आस्था का केन्द्र बिन्दु है नरांव-कोठिया सूर्य मंदिर

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रवि कुमार सिंह की रिपोर्ट

भारत की भूमी सनातनधर्मावलंबियो व धार्मिक स्थलो का गढ है। यहां ऐसे-ऐसे धार्मिक केन्द्र व धार्मिक पर्यटन स्थल है जो विदेशी शैलानियो को भी मंत्र मुग्ध कर देता है। वहीं भारतीय संस्कृति में प्रत्यक्ष देव के रूप में पूजित भगवान सूर्य का मंदिर है इन्ही कड़ियो में उत्तर बिहार के सारण जिला के कोठिया- नरांव स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में शुमार गडखा प्रखंड के अवतारनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जो छपरा पटना मुख्य सडक मार्ग व छपरा सोनपुर रेलखंड के मध्य में स्थित है ।सडक मार्ग से आने पर मुसेपुर से सूर्य मंदिर प्रवेश द्वार होकर व रेल मार्ग से बड़ागोपाल या डुमरी जुअरा स्टेशन से होकर यहा पहुंचा जा सकता है | तीनो स्थलो से लगभग समान दूरी से तीन कीलोमीटर है। वहीं सारण जिला मुख्यालय से यह मंदिर 18 किमी की दूरी पर है।

रमणीक वातावरण के बीच अवस्थित है मंदिर

नरांव पंचायत के नारायण डीह से दक्षिण में स्थित यह मंदिर जो प्रकृतिक वृक्षो के अनुपम श्रृंगार से चारो तरफ से अच्छादित है। सूर्य मंदिर रमणीक वातावरण व स्वच्छ माहौल के साथ ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है मंदिर परिसर के चारों ओर से विशालकाय पौधों से आच्छादित है जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है | इस मंदिर की स्थापना 26 अप्रैल 1990 को संस्थापक  श्री रामदास जी महाराज की पहल पर नौ कुंडीय श्री महायज्ञ के पश्चाताप हुआ था | इस मंदिर का उद्घाटन जिले के तत्कालीन डीएम श्री व्यास जी के द्वारा किया गया था
यहां का इतिहास हजाडो वर्ष पहले का है जब सिर्फ एक छोटा रामजानकी मंदिर हुआ करता था।यह सप्तरिषयो का योग केन्द रहा है जिसका जुडाव अयोध्या, रांची ,फतेहा, जलंधर आदि केंद्रों से है।
यह स्थल 20 वी सदी के उतराद्र मे वास्तविक रूप से फलना फूलना शुरू किया।चार चांद तब लगा
जब सप्त रिसी  श्रीश्री1008 श्री राम दास जी महाराज द्वारा सूर्य कुण्ड का उद्धार व सूर्य मंदिर निर्माण कराया गया ।इसके बाद नौ कुण्डीय यज्ञ शुरू हुआ देश  के कोने-कोने से संत महात्मा व नागाओ का आगमन हुआ ।तब से दिनो दिन यहांकी रौनकता बढती गई और आज यह स्थल पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित होने के कागार पर है। 2016 मे गडखा सी ओ अश्विनी कुमार चौबे ने इस स्थल का फोटो ग्राफी व विडियो फुटेज बनवाकर पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने हेतु उप विकास आयुक्त(डी डी सी) सारण को दिया है |

सात घोड़ों पर सवार है सूर्य

मंदिर में भगवान सूर्य की काले रंग की प्रतिमा स्थापित है भगवान भगवान भास्कर यहां काले घोड़े पर विराजमान है जो सात अश्वों पर सवार भगवान भवन भास्कर काले रंग की प्रतिमा बनी है जो अश्वों पर विराजते सूर्यदेव सात अश्वों की लगाम थामे मानों इंद्रिय निग्रह एवं संयम का उपदेश देते हुए | वहीं सूर्य मंदिर के मुख्य द्वार पर उन संतों की बड़ी श्रद्धा से याद किया गया है जिन्होंने यहां आकर भक्ति और शांति की शिक्षा दी |

सूर्य मंदिर के सामने विशाल भव्य सूर्यकुंड

सूर्य मंदिर के सामने विशाल व भव्य सूर्यकुंड अवस्थित है जिसका निर्माण कई शताब्दी वर्ष पूर्व हुआ था एवं मंदिर निर्माण के समय ही इस सूर्यकुंड (तालाब) का जीर्णोद्धार हुआ | आज यह सूर्यकुंड इलाकों में अपनी सुंदरता व स्वच्छता के मामले में काफी प्रसिद्ध है इस सूर्यकुंड में प्रवेश करने के लिए चारों ओर से आकर्षक सीढ़ियां बनाई गई है इस सूर्यकुंड के चारों और घेराबंदी किया गया है उसका भव्य रंगारंग मनोरम छटा उपस्थित करती है | ऐसी धारणा है कि इसमें स्नान कर लेने के बाद चर्म रोग नहीं होता है |

संतो को किया गया है याद

मंदिर की स्थापना करने वाले श्लोकदास जी महाराज के प्रति यहां के लोगों के मन में अपार श्रद्धा है उनके सुरलोक सिधार जाने के बाद 1952 में राम दास जी महाराज ने मंदिर की जिम्मेवारी संभाली |  सप्तर्षि श्री महंत रामदास जी महाराज, श्री बालक दास नागाजी, श्री पुजारी सीताराम दास जी, श्री महंत दास जी के नाम उल्लेखनीय हैं | महंत रामदास जी की प्रतिमा भी स्थापित हैं हालांकि मंदिर की ऐतिहासिकता बहुत पुराना है |

छठ में उमड़ते हैं व्रती व श्रद्धालु

सूर्य मंदिर परिसर में अवस्थित सूर्य कुंड में छठ करने के लिए चैती हुआ कार्तिक छठ में व्रतियों व श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है | मदनपुर, नरांव,धनौरा, कोठिया, मौजमपुर, मूसेपुर, डुमरी, बड़ागोपाल आदि जगहों के हजारों लोग इसी परिसर में भगवान भास्कर को अर्घ देकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हुए सूर्य मंदिर में अवस्थित भगवान भास्कर का दर्शन करते हैं | कार्तिक छठ में सूरजकुंड के चारों ओर व्रतियों की खचाखच भीड़ होती है स्थानीय लोग के अलावा उनके रिश्तेदार भी छठ पर्व में इस जगह आना नहीं भूलते हैं |
छठ के मौके पर यहां हजारों व्यक्ति उपस्थित होते हैं और प्रकृति की मनोरम छटा का लुत्फ उठाते हैं |

स्वच्छता पर दिया जाता है विशेष ध्यान

मंदिर परिसर में सूर्य कुंड की स्वच्छता बनी रहे इसके लिए स्थानीय लोग विशेष ध्यान देते हैं इसके पानी की स्वच्छता बनी रहे इसलिए स्थानीय लोग इसमें किसी सामान की प्रवाहित नहीं करते हैं यहां तक कि छठ पर्व पर कोशी व दीप आदि को विसर्जित करने के लिए कुंड की पूर्वी छोर पर अलग से कुंड का निर्माण करवाया गया है एवं छठ पूजा के बाद लोग इसी में पूजा से संबंधित बेकार पदार्थ को प्रवाहित करते हैं | छठ के दिन यहां भक्ति और आस्था का ऐसी धारा बहती है कि देखकर मान भाव विभोर हो जाता है |

सज धज को तैयार है सूर्य मंदिर

इस वर्ष सूर्य मंदिर व सूर्यकुंड का रंगारोगन कर इसे आकर्षक स्वरूप दिया गया है मंदिर की सुंदरता बढ़ाने के लिए मंदिर के अलावा उसके परिसर में मनमोहक लाइटिंग की व्यवस्था की गई है साथ ही मंदिर आने वाली सड़कों को संवारा व सजाया गया है |

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