क्या मॉब लिंचिंग आपको तभी दिखेगा जब भीड़ आपके पिता, भाई, दोस्त को मार देगी ? – प्रो. आनन्द कुमार

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क्या मॉब लिंचिंग आपको तभी दिखेगा जब भीड़ आपके पिता, भाई, दोस्त को मार देगी ? – प्रो. आनन्द कुमार

23 अप्रैल 2019 (गुरूवार)

देश के जाने-माने समाजशास्त्री एवं समाजवादी नेता प्रोफेसर आनन्द कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर महाराष्ट्र मॉब लिंचिंग पर अपनी व्यथा जाहिर की है। उन्होंने कई प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार एवं आर एस एस पर सीधे-सीधे भी वार किया है।

आइए देखते हैं कि क्या कुछ लिखा है प्रोफेसर आनन्द कुमार ने :

“महाराष्ट्र के पालघर में हुई लिंचिंग की घटना पर गौर करने की जरूरत है –

1. किसी भी सत्ताधारी पार्टी (शिवसेना, कांग्रेस) ने हत्यारों को मालाएं नहीं पहनाईं जैसा कि हर लिंचिंग के बाद भाजपा नेता पहनाते हैं।

2. अगली सुबह ही 110 लोगों को जेल भेज दिया गया, जबकि संघ-भाजपा नेताओं द्वारा हत्यारों को टिकटें दी गईं थीं।

3.किसी नेता ने हत्यारों के समर्थन में भाषण नहीं दिया जैसा कि दादरी मामले में भाजपा विधायकों-सांसदों द्वारा दिए जाते रहे।

4. मृतकों के परिजनों पर FIR दर्ज नहीं की गई जैसा कि योगी द्वारा अखलाक के परिवारजनों पर की गई थी।

5. हत्यारों के समर्थन में फंड रेजिंग नहीं की गई, जैसा कि शंभु रैगर जैसे हत्यारे के समर्थन में आरएसएस के लोगों द्वारा की गई थी।

6. हत्यारों की फ़ोटो को फेसबुक व्हाट्सएप की डीपी पर नहीं लगाया गया जैसा कि शंभु रैगर जैसे हत्यारे के फोटोज को आरएसएस समर्थकों ने लगाया था।

7. किसी ने भी धार्मिक नारे नहीं लगाए, जैसा कि अक्सर जय श्री राम के नारे संघ समर्थकों द्वारा लगाए जाते थे।

8. जी न्यूज ने अपनी वेबसाइट पर हत्यारों के लिए जेहादी कट्टरपंथी लिखा, तालिबानी लिखा। लेकिन जैसे ही पता चला कि हत्यारे हिन्दू ही थे, सब गायब हो गए। हिन्दू हितों वाले भी, और हिन्दू मीडिया भी।

9. मुझे उम्मीद है आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की तरह कोई अन्य नेता बेशर्मी से ये भी नहीं कहेगा कि लिंचिंग तो विदेशी शब्द है। इसका भारत से कोई लेना देना नहीं।

इस पूरे प्रकरण से पता लगाया जा सकता है कि इस देश में लिंचिंग कल्चर के पीछे कौन संगठन, कौन विचारधारा है। कौन लोग इसे बढ़ावा दे रहे हैं। मुझे मालूम है आपकी आंखों को ये तब तक नहीं दिखाई देगा, जब तक कि ये भीड़ किसी दिन आपके पिता, भाई, दोस्त को खचेरते हुए मार न देगी। तब तक आप इस खुशफहमी में रहिए कि मुसलमान ही तो मारे जा रहे हैं। हम तो सुरक्षित हैं न।”

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