जानें दल बदल कर चुनाव लड़ने वालों का क्या रहा हाल, कौन जीता किसको मिली हार

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राजद, जदयू और कांग्रेस के करीब दर्जनभर नेताओं ने इस बार नया चुनावी अखाड़ा बदल लिया था। इनमें से कुछेक को छोड़ दें तो अधिकांश के लिए यह प्रयोग नुकसानदेह साबित हुआ। उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिन लोगों का चुनाव क्षेत्र बदलना फायदेमंद रहा उनमें राजद के तेजप्रताप यादव, जदयू के मदन सहनी और कांग्रेस के विजय शंकर दूबे शामिल हैं।राजद के सर्वाधिक आधा दर्जन नेता इस बार अपना चुनाव क्षेत्र बदलकर दूसरी सीटों से चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव महुआ सीट छोड़ हसनपुर से लड़े और जीत दर्ज की। राजद के पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी अलीनगर की जगह केवटी गए मगर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव बहादुरपुर की जगह हायाघाट से और जदयू छोड़ राजद का दामन थामने वाले  अमरनाथ गामी हायाघाट की जगह दरभंगा से चुनाव लड़े मगर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम राजापाकड़ की जगह पातेपुर से लड़े पर जीत नहीं सके। सीट बदलने वाले राजद के यदुवंश कुमार यादव को निर्मली की जनता ने नकार दिया।एक मंत्री को स्वीकारा, दूसरे को नकारा 2015 में घोसी से जीतने वाले कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने सीट बदलकर जहानाबाद का रुख किया था लेकिन उन्हें हार नसीब हुई। नए क्षेत्र के मतदाताओं ने उन पर अपना भरोसा नहीं जताया। वहीं सीट बदलकर दरभंगा के गौड़ा बौराम से बहादुरपुर से चुनाव लड़ने वाले सरकार के मंत्री मदन सहनी को नए क्षेत्र की जनता ने हाथों-हाथ लिया और उन्हें जीत की माला पहनाई। कांग्रेस के दूबे जीते, अशोक हारे : पूर्व मंत्री बिजय शंकर दुबे पिछली बार मांझी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इसबार पार्टी ने उन्हें महाराजगंज से उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गये। इसी तरह कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता डा. अशोक कुमार पिछली बार रोसड़ा से चुनाव जीते थे। इस बार उन्होंने कुशेश्वर स्थान से अपनी किस्मत आजमाई है वह चुनाव हार गये।

 

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