जिला परिषद दुकान निर्माण में देरी लोगो के लिये बन रहा परेशानी का सबब

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दिघवारा बाजार में प्रसासनिक उदासीनता ने जिला परिषद की दुकानों को डाला 5 वर्षीय लॉक डाउन मोड में

कोरोना संकट से भी बड़ा मामला दिघवारा के जिला परिषद के दुकानों का

अनुज प्रतीक की कलम से✍🏼

दिघवारा प्रखण्ड के दिघवारा बाजार में सारण जिला परिषद की जमीन में जिला परिसद द्वारा दुकान निर्माण की देरी अब स्थानीय लोगो के लिये परेसानी का सबब बनता जा रहा है वही निर्माणाधीन दुकानों में कब्जे को लेकर स्थानीय दुकानदार बार बार आपस में उलझते नजर आ रहे है ।वही देश मे जारी कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉक डाउन तो महज तीन माह तक ही रहा वही इस बाजार को लॉक डाउन हुई लगभग 5 साल पूरा हो गए।ज्ञात हो की विगत वर्ष 2015 के जुलाई माह में उच्च न्यायलय के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन ने बाजार में बसे सैकड़ो दुकानदारों को हटाते हुए उनकी दुकानों को तोड़ दिया था । वही उक्त जगह पर पुनः निविदा निकाल कर दुकान निर्माण की बात जिला परिषद ने शुरू किया ।।उच्च न्यायालय के फैसला में शामिल 86 दुकानदारों को जिला परिषद ने प्रथमिकता दिया और साथ ही बाकि बचे दुकानों के लिये भी लोगो से फॉर्म भरवाए गये। दुकान टूटने और रोजगार छिनने के कारण प्रभावित दुकानदारों ने आनन फानन में दुकानों के लिये जिला परिषद में बजाप्ता पगड़ी की रकम तक जमा करवाकर जल्द दुकान मिलने की आसा पाल लिये ।वही स्तर पर दुकान निर्माण में आई छोटी मोटी अड़चनों को जिला परिषद दूर करते हुए जब दुकान निर्माण का कार्य शुरू करवाया ।उसी वक्त कुछ स्थानीय लोगो ने बिहार में लागु बिल्डिंग बाइलॉज का हवाला देते हुए और जिला परिषद पर बिना नक्सा दुकान निर्माण की बात लगभग रोक दिया ।

काफी लंबे अरसे के दुकान दार बने फुटपाथी

दुकान टूटने पहले कई जगह लोगो की पक्की एवं स्थाई दुकान था जिसमें लोग अपना व्यवसाय किया करते थे। दुकान टूटने के लगभग डेढ़ साल में भी कोई दुकान पूर्ण नही बन पाया ।और जो दुकानदार लाखो रुपये के व्यसाय करने वाले आज सरको पर घूम रहे है साथ ही कही कहि फुट पाथ पर अपनी दुकान चलकर जीविका चलाने में मजबूर हो रहे है।दुकान निर्माण पर रोक के बावजूद आपस में कई बार दुकानदार उलझ जा रहे है।वजह सिर्फ अपनी पिछली दुकानों के आगे फुटपाथ पर दुकान लगाने को लेकर सभी अपनी अपनी पुरानी दुकानों चिंतित हो गये है साथ एक दूसरे के पुराणी दुकानों के सामने दुकान लगाने पर उलझते है।

अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय ने दिया था आदेश

पिछले कई वर्षों से दिघवारा बाजार में स्थानीय दुकानदार और जिला परिषद में दुकान निर्माण को लेकर मुकद्दमा का लंबा दौर चला । और अंत में उच्च न्यायालय ने पुराणी दुकानदारों को अतिक्रमणकारी घोसित करते हुए दुकानों को तोड़ने का आदेश दे दिया था।उसी आदेश के आलोक में दुकानें बाजार में तोड़ी गई थी।

नये अर्ध निर्मित दुकानों पर भी मारे ताले

बाजार में जिला परिषद द्वारा निर्माणाधीन दुकानों में पूर्व में रह रहे दुकानदारों ने अपने अपने कब्जे दिखाने शुरू कर दिए है।बांस की चचरी से लेकर अस्थाई छत डालकर दुकानदार अपनी दुकानों को चला रहे है।

दुकानों को पुनः उच्च न्यायालय के आदेश कर दिया खालीं,कटीले तार से की गई अर्धनिर्मित दुकानों की सीलिंग

पूर्व में निकले निविदा के अनुसार प्राप्त दुकानदार जब दुकानो के आवंटन में वर्षो का विलम्ब होता देखे तब उन्होंने पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया वही उच्च न्यायालय ने अर्ध निर्मित दुकानों को भी खाली करवाने का आदेश दे दी।जिसके बाद अधिकारियों के भारी भरकम भीड़ ने दिघवारा बाजार के अर्धनिर्मित दुकानों में से दुकानदारों को हटाते हुए कटीले तार की घेराबंदी करा दिया।

आदेश पर आदेश मगर नही मिली दुकान

दिघवारा बाजार में जिला परिषद द्वारा निर्माणाधीन दुकानों की स्थिति उन आवंटियों के लिये परेशानी का सबब बन गया है जिन्होंने जिला परिषद द्वारा निकाली गई निविदा में आवेदन देकर दुकान की मांग की थी।उन आवंटियों ने बार बार उच्च न्यायालय की शरण मे जाकर जिला परिषद से जल्द दुकान दिलावने की मांग करते रहे ।और उनकी याचिकाओं पर सुनवाई पश्चात न्यायालय ने दो तीन मर्तबा आदेश पारित कर आवंटियों को पहले तो पूर्ण फिर जैसे है वैसे हालात तक मे दुकान आवंटन का आदेश दिया लेकिन कानून की लंबी लड़ाई एव लगभग 5 वर्ष की जद्दोजहद के बावजूद अब तक दुकान न तो पूर्ण रूपेण निर्मित हुए और न ही दुकानों का आवंटन हो पाया।

वही इस बाजार के निर्माण में प्रमुख बाधा बनी बिहार भवन उपविधि नियम

दिघवारा में जिला परिषद द्वारा बनाये जा रहे दुकान पर उस वक्त ग्रहण लग गए जब बिहार में लागू भवन उप विधि नियम 2014 को पूर्णतः लागू करवाने की मांग को लेकर कुछ लोग न्यायालय की शरण मे जा पहुँचे। नतीजा जैसे तैसे हालात में निर्माण कार्य रोक दिए गए।वही इसके कारण लगभग 5 वर्षो से स्थानीय दुकानदार किसी तरह अपनी रोजी रोटी जुटाने में लगे है।

नियम लागू होने के बाद निजी क्षेत्र में हो गए कई निर्माण
लेकिन सरकारी कार्य मे नियम के पचड़े

वही ऐसा नही है कि उस अवधि में सरकारी एवं ग़ैरसरक़्क़री निर्माण कार्य पर स्थानीय निकाय ने किसी तरह का रोक लगाए हो।बिहार भवन उप विधि नियम को ताक पर रखकर इस दो वर्षों के अवधि में इलाके में कई व्यवसायिक कम्प्लेक्स का निर्माण हुआ है।।मगर इस ओर नाही सरकारी अमले और नही और पीड़ित दुकानदारों के पक्ष से कोई ठोस बयान दे रहे है।।
इलाके में निर्माण में बिहार भवन उपविधी नियमो का पालन सुचारू रूप से नही हो पा रहा है।।सरकार के विभाग द्वारा इस नियम को निजी भवनों पर लागू करवाने में लगभग शिथिल हो गई है जिसका नजायज फायदानिर्माण में जुटेनिजी निर्माणकर्ताओं को मिल रहा है।

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