बंद पड़े सिंचाई विभाग के नलकूपों से किसानों को नहीं मिल रही है फसल सिंचाई की सुविधाएं,हो रही है परेशानी

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रौशन कुमार
परसा:-प्रखंड के किसान वर्षों से कृषि संबंधित समस्याओं से जूझ रही है।किसानों के हित में वर्षों से सरकार द्वारा किए जा रहे विकास की दावे धरातल पर दंभ भर रही है।स्थिति यह है की विगत 23 वर्षों से किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए बना राजकीय नलकूप बंद पड़ा है।एक वर्ष पूर्व विभाग द्वारा नए नौ नलकूप का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नही होने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल सका है।निर्माण में गुणवत्ता की कमी के कारण सिंचाई के लिए बना चैनल दर्जनों जगह टूटकर बिखर चूका है।और साल पूर्व कई पंचायतों में बना यह नलकूप शोभा की बस्तु बनी हुई है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि वर्ष 1975 में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में किसानों के खेतों की पटवन के लिए नलकूप लगाई गई थी।इसके संचालन के लिए ऑपरेटर व चौकीदार की व्यवस्था की गई थी।वही कुछ बाढ़ की विभीषिका में क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था ठप होने के बाद विभागीय लापरवाही के कारण बंद पड़ा है।किसान बताते है कि सरकार किसानों को खेती के लिए हर सुविधा देने की घोषणाएं कर रही है।खासकर वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है।किंतु खेतों में सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करना महज एक दिखावा बनकर रह गया है।
नहीं मिल रही सिंचाई सुविधा
बंद रहने के कारण प्रखंड के अन्याय,गौरीगवा,बभनगवा,माड़र,शोभे परसा,बनौता,कोहरा मठिया,परसौना,पचलख आदि गांव के चार हजार छोटे बड़े किसानों की दो हजार एकड़ फसल की सिंचाई सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।किसानों ने बताया एक वर्ष पूर्व किसानों के मांग पर इन सभी जगहों पर नए नलकूप का निर्माण कराया गया।तब किसानों को आस जगी की अब खेतों की सिंचाई के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।लेकिन निर्माण के बाद इसे चालू करवाने के लिए कोई भी पहल नहीं की गई।इसके कारण आज तक राजकीय नलकूप बंद पड़ा है।बताया गया कि समस्या को लेकर किसान लगातार आवाज उठाती आ रही है।लेकिन कोई भी पदाधिकारी व प्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दिए।कोरोना व बाढ़ के बीच आर्थिक से जूझ रहे किसानों ने इस बार भी रवी की फसल गेहूं, मक्का, तेलहन व दलहन की बुआई की है।अब किसानों को फसल पटवन की चिंता सताने लगी है ऐसे में सभी सरकारी नलकूप ठप पड़े है। इसे देख किसानों में मायूसी व्याप्त है।
नलकूपों को ठीक कराने में अधिकारी नहीं ले रहे रुचि
 विभागीय सूत्र की माने तो नलकूपों के रखरखाव हेतु सरकार ने मुखिया के खाते में राशि भी हस्तांतरित की है लेकिन सुस्ती व विभाग द्वारा कारगर रूख अख्तियार नहीं करने से नलकूपों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा नलकूप चालकों की बहाली प्रकिया नहीं किए जाने से नलकूपों की स्थिति और भी दयनीय हो गई।नलकूपों की बदतर हालत से किसानों को डेढ़ सौ रुपये प्रति घंटा की दर से सिंचाई करनी पड़ रही है।
हर स्तर पर हो रही है परेशानी,स्थानीय विधायक ने जाताई नाराजगी
परसा विधानसभा क्षेत्र के विधायक छोटेलाल राय की माने तो उन्होंने कहा कि यह काफी निंदनीय विभाग है।लघु सिंचाई विभाग है जो प्रखंड में नलकूप बंद कर वहां पर प्रतिनियुक्ति कर्मियों की वेतन दिया जाता है। किसान के लिए सरकार विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। नलकूप चालू करवाने के लिए हम जिलाधिकारी व प्रधान सचिव से शिकायत करेंगे। किसानों की खेती पटवन के लिए जिला प्रशासन को कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने चाहिए। क्योंकि जल नलकूप बंद हो जाने के कारण किसानों को खेती की पटवन में काफी कठिनाई की सामना करना पड़ता है।
कहते हैं अधिकारी
लघु सिंचाई के जई ने बताया कि सभी नलकूपों की स्थिति का अवलोकन करने के बाद खराब नलकूप को ठीक करने के बाबत उच्चाधिकारी को स्मारित किया जाएगा।व कुछ अभी अर्धनिर्मित है उसका सरकार द्वारा पैसा आवंटित हो चुका है उसे भी जल्द निर्माण पूरा कर लिया जायेगा।
प्रवीण कुमार कश्यप
जेई,लघु सिंचाई विभाग परसा,मकेर

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