बिहार के गोपालगंज में चुनाव लड़ रहे ये PM मोदी, चौंक गए? अरे! असली नहीं, हमशक्ल हैं

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बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों (Candidates) के लिए वोट मांगने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक नरेंद्र मोदी यहां चुनाव मैदान में निर्दलीय जोर आजमा रहे हैं। चाैंकिए नहीं, ये असली नहीं, प्रधानमंत्री के हमशक्ल हैं। हम बात कर रहे हैं हथुआ विधानसभा सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमशक्ल अभिनंदन पाठक (Abhinandan Pathak) की। उनके कारण यह सीट चर्चा में आ गई है।

यूपी में भी लड़ चुके चुनाव, बिहार में कर रहे सास की सेवा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर के कपिल बिहार कॉलोनी निवासी अभिननन्‍दन पाठक हथुआ (Hathua Assembly Seat) में निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। इसके पहले वे सहारपनुर से लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 में उन्होंने वाराणसी से भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पर्चा भरा था। गाेपालगंज के फुलवरिया प्रखंड के सवौनहां गांव में उनकी ससुराल है, जहां बीते 14 महीने से वे अपनी सास की देखभाल कर रहे हैं।

चेहरे व कद-काठी के कारण लोग कहते नरेंद्र मोदी

खास बात यह है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल नहीं करते हैं, बल्कि चेहरे व कद-काठी के कारण लोग उन्हें देखते ही मोदी-मोदी कहने लगते हैं। चुनाव मैदान में कूदने के बाद अभिनंदन पाठक खादी का कुर्ता व पायजामा पहनकर सुबह अपना प्रचार करने के लिए साइकिल से क्षेत्र में निकल जाते हैं। वे जिधर से गुजरते हैं, लोग घेर लेते हैं। उनके पिता गांधी आश्रम में काम करते थे, जिस कारण वे बचपन से ही खादी का कुर्ता व पायजामा पहनते हैं।

हमशक्‍ल होने का मिला लाभ तो परेशानियां भी झेलीं

अभिनंदन बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर उनके लिए प्रचार भी किया था, लेकिन अब न तो उनके समर्थक हैं, न ही विरोधी। कहते हैं कि प्रधानमंत्री का हमशक्ल होने का लाभ है तो परेशानयां भी कम नहीं। इस कारण कई बार लोगों ने प्यार दिया तो साथ में सेल्फी लेने के लिए कपड़े तक फाड़ दिए। हां, कई बार भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों के आक्रोश के कारण भी उनके कपड़े फटे।

अच्‍छे लोग राजनीति में आएं तो नहीं उठेंगे कई सवाल

अभिननदन पाठक कहते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान जब युवा उनसे युवा बेरोजगारी, विकास आदि के सवाल करते हैं तो वे यही जवाब देते हैं कि यह देश हम सभी का है। वादे पूरा न कर पाने की वजह राजनीतिक दलों के साथ हम लोग भी जिम्मेदार हैं। अच्छे लोग राजनीति में आएंगे तो ऐसे सवाल नहीं उठेंगे।

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