महिलाओं ने व्रत रख मांगी संतान की दीर्घायु,किया निर्जल व्रत

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परसा:-संतान की मंगलकामना व दीर्घायु को लेकर गुरुवार को महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। इस अवसर पर व्रती महिलाओं ने भोर में चूहो, सियारिन व पितर-पितराइन को अपने कुल की परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित किया। इसके बाद मीठा भोजन के तौर पर दही-चिउरा आदि ग्रहण कर सरगही की विधि पूर्ण की।इसी के साथ 24 घंटे का निर्जला उपवास  शुरू हो गया।शाम को व्रती महिलाओं ने नदी-घाटों व घरों में स्नान किया।प्रखंड क्षेत्र के बलिगांव पंचायत स्थित बलिगांव नारायणी नदी में स्नान करने के लिए महिलाएं पहुंची। महिलाओं ने स्नान के बाद अपनी-अपनी पितराइनों व जीवितवाहन भगवान को बेलपत्र व तेल अर्पण किया। इसके बाद घाटों की पूजा की।इसमें मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है, जिसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। जीवितवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप,अक्षत पुष्प आदि अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई।आचार्य गजेंद्र तिवारी से जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनने के बाद जीवितवाहन भगवान की प्रतिमा की बनी माला को गले में धारण किया और संतान की सलामती की दुआ मांगी। कई महिलाओं ने तो संतान की संख्या के आधार पर जीवितवाहन भगवान की प्रतिमा को धागे में पिरोकर धारण किया। एक दूसरे को सिन्दूर लगाकर सुहाग की सलामती की कामना भी की। शाम को खरजिउतिया करने वाली व्रतियों ने तारा देखकर अन्न-जल ग्रहण किया।शुक्रवार को जिउतिया रखने वाली महिलाएं पारण करेंगी।अन्याय पंचायत के गौरीगवा गांव की सरपंच विद्यावती देवी, मनोरमा देवी,बेबी देवी,अंजू देवी,अनिता देवी,रीमा देवी,रेशमी देवी,कांति देवी,संगीता देवी ने बताया कि संतान के लिए जिउतिया सबसे उत्तम पर्व है। इससे उनपर आने वाली विपत्ति दूर होती है।

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