भारतीय रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। इससे लोन महंगे नहीं होंगे और EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। RBI ने महंगाई और वैश्विक हालात को देखते हुए फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपनाई है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
नई दिल्ली. नए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने इसे 5.25% पर बरकरार रखा है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI में भी कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 8 अप्रैल को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी सस्ते लोन देने लगते हैं। वहीं, दर बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं।
2025 में चार बार हुई कुल 1.25% कटौती-
RBI ने 2025 के दौरान लगातार चार बार ब्याज दरों में कटौती की थी:
फरवरी 2025: 6.50% से घटाकर 6.25%
अप्रैल 2025: 0.25% की कटौती
जून 2025: 0.50% की बड़ी कटौती
दिसंबर 2025: 0.25% की कटौती, दर 5.25% पर आई
लगभग 5 साल बाद 2025 में दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हुआ था।
क्यों नहीं बदली गई ब्याज दर?
RBI ने इस बार ब्याज दरों को स्थिर रखने के पीछे कई अहम कारण बताए हैं:
महंगाई में फिर से बढ़ोतरी का खतरा-
खराब मौसम और बेमौसम बारिश से खाद्य कीमतों में उछाल की आशंका
ईरान-इजरायल तनाव से सप्लाई चेन पर असर
ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता
RBI फिलहाल “वेट एंड वॉच” यानी ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहा है।
RBI गवर्नर ने कहा:
भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति मजबूत बनी हुई है
वैश्विक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में, चुनौती पैदा कर रहा है
ऊर्जा (तेल-गैस) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से ग्लोबल ग्रोथ प्रभावित हो सकती है
अनिश्चितता का असर आर्थिक आउटलुक पर पड़ रहा है
हर दो महीने में होती है MPC मीटिंग-
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल 6 सदस्य होते हैं—3 RBI के और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त। यह कमेटी हर दो महीने में बैठक करती है। वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 6 बैठकें प्रस्तावित हैं।
RBI क्यों बदलता है ब्याज दर?
किसी भी सेंट्रल बैंक के लिए ब्याज दर (पॉलिसी रेट) महंगाई को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण हथियार होता है:
महंगाई बढ़ने पर: RBI दरें बढ़ाता है → लोन महंगे → खर्च कम → महंगाई नियंत्रण
आर्थिक सुस्ती में: RBI दरें घटाता है → लोन सस्ते → खर्च बढ़ता है → ग्रोथ को बढ़ावा
Published at : 08 Apr 2026, 07:21 am (IST)
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