apne gaon se pyar kro sahab

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जब बड़े- बड़े शहर आपका साथ छोड़ेंगे तो गाँव ही आपको अपनाएगा, इसलिये गाँव से प्यार करो साहब

सम्पादकीय 2

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण तेजी से फैलाता जा रहा है आये दिन इसकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है वंही बड़े- बड़े शहरों में गाँव छोड़कर गए मजदूरों की हालत बहुत गंभीर बनी हुयी है।

भूखे प्यासे मजदूर खाने के लिए तरस रहे है तो कई आत्महत्या भी कर चुके है। सोशल मीडिया पर जो जानकारी और चलचित्र मजदूरों से जुड़े मिल रहे है उन्हें देख कर ह्रदय बैठ जाता है कि ये हमारे बीच ही रहने वाले भाई- मित्रगण है।

तब मै बचपन की उन बातों को याद करता हूँ जब गाँव विभिन्नता तो थी लेकिन मदद के लिए हजार हाँथ खड़े होते थे कोई भूख से नहीं मरता था।

कभी गांव की एक कहावत थी कि एक किसान 84000 हजार जीव जंतु को भोजन देने में सक्षम है। ऐसी कहावते बचपन में हमने अपनी नानी से सुना था। आज जब पूरा देश बंद है तब किसान खेतों में और किसान का बेटा जवान सीमा पर खड़ा है।

हजारों किलोमीटर बगैर किसी साधन के छोटे-छोटे बच्चे लेकर भूखे पेट भटकने वाले मजदूर इस लिए भटक रहे है क्यूंकि जीवन जरूरी है ‘जान है तो जहान है’ लेकिन यह बाते केवल टीवी पर नेताओ ने कह दी है।

भारत जैसे देश में वादा करना तो आसान है लेकिन इस विभन्नता वाले देश में सिर्फ बड़े बड़े वेड से ही नहीं जमीनी हकिकत में काम करने की जरूरत है। जब तक दिल से सभी को भारतवासी मानकर जाति, धर्म से ऊपर उठकर काम नहीं करोगे तब तक लोगो को तक योजनाओ का पहुँच पाना मुश्किल है।

देश की 65 -70 % आबादी गांव में रहती है 25 -30 % नगरों में दुर्भाग्य से विकास का 80% पैसा शहरों में खर्च होता है। 20% गाँव तक नहीं पहुंचता है। 70 बरस पहले देश में 7 लाख से अधिक गांव थे कितने गांव को शहर खा गए यह बताना अभी उचित नहीं है जिस शहर में मेरे गांव का जनपद मुख्यालय है कई गांव खा गया नाम शेष है कई नए नगर बस गए सैकड़ों नगर बसे एक भी नया गांव नहीं बसा।

मेरे जिले में 30 बरस पहले बाढ़ के कारण 1 गांव तत्कालीन जिलाधिकारी ने ओझा गांव बसाया था जिसे बाद में ओझा नगर कहा जाने लगा कई गांव को बांधों ने उजाड़ दिया गांव का बेटा किसान अपना सब कुछ लगा कर देश का पेट भर रहा है सब प्रकार के जुल्म सहकर जिन लोगों ने किसी कारण बस गांव छोड़ दिया था शहर में रहकर अपना जीवन यापन अपने बच्चों को जिया रहे थे शायद गांव नहीं होता तो आज वह क्या करते ?

शहर ने तो उन्हें भगा ही दिया है। देश की राजधानी दिल्ली में अभी 225 गांव बचे हैं दिल्ली कभी तहसील थी 400 गांव थे पंजाब राज्य की सरकारों ने जिन्हें सबसे पिछड़ा जिला कहा था।

जनपद बांदा में 761 गांव चित्रकूट में 607 गांव हमीरपुर में 635 गांव महोबा में 526 गांव झांसी में 837 गांवजालौन में 1165 गांव ललितपुर में 758 गांव आज भी खड़े हैं। खेत खलिहान गांव गली गांधीजी ग्राम गणराज्य की बात एक शताब्दी पहले करते थे विनोवा जी ग्राम स्वराज्य की बात करते थे उनका अनुभव सही था भविष्य में गांव भी हमें बचा पाएंगे ।

इन आपदाओं से पूज्य दीनदयाल उपाध्याय जी ने जिस ग्राम विकास की अवधारणा हमारे सामने रखी है हमें उस ओर चलना होगा । हमारे देश के कई महापुरुषों ने गांव में जन्म लिया और अंतिम सांस भी गांव में ही ली है। जरूरी सरकारें गाँव की तरफ ध्यान दे इससे पलायन रुकेगा और शहरो में भीड़ कम होगी।

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