नेता हो तो नीतीश कुमार जैसा हो: प्रगति मेहता

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गिद्धौर/पटना (11 मई 2020) : लॉक डाउन में मजदूरों एवं छात्रों के मुद्दों पर एक तरफ जब बिहार सरकार की सब तरफ किरकिरी हो रही है, वैसे में जदयू के प्रदेश महासचिव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुपर-डूपर हिट सीएम बता दिया है. प्रगति ने कहा कि वे जदयू सदस्य होने के नाते नहीं, बल्कि एक सामान्य बिहारी होने के नाते यह बात कह रहे हैं कि अगर नेता हो तो नीतीश कुमार के जैसा हो.

अपने लेख में प्रगति आगे कहते हैं “मुझे पता है कि यह बात कई लोगों को तीर की तरह चुभेगी, मिर्ची भी लगेगी. इन सब के बावजूद जो सच्चाई है वह तो लिखूंगा ही। यह लेख मैं कोई जदयू का कार्यकर्ता होने के नाते नहीं लिख रहा हूँ। यह मैं पूरी तरह एक बिहारी बनकर लिख रहा हूँ। एक हिंदुस्तानी की तरह सोच रहा हूँ। राजनीति में पक्ष और विपक्ष की बात होती है। आप दूसरी राजनीतिक पार्टी के समर्थक हो सकते हैं। हो सकता है कि जदयू या नीतीश कुमार जी की विचारधारा आपको ना पसंद हो। लेकिन अपने राज्य, गांव और अपने परिवार का हित तो आप जरूर चाहते होंगे, इसमें तो कोई संशय नहीं है।

अब लॉक डाउन में बिहारियों को दूसरे राज्यों से लाने का ही मुद्दा लें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता को हम सलाम करते हैं। राजनीतिक नफा और नुकसान की बगैर कोई जोड़-घटाव किये उन्होंने साफ कहा कि अभी उन्हें लाना लॉक डाउन का उल्लंघन होगा। लेकिन उनकी बात को राजनीतिक चश्मे से देखने वाले तुरंत बात का बतंगड़ बनाने लगे। नीतीश कुमार को बिहारियों का विरोधी ही बताने लगे. विरोधियों को लगा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे बिहारियों के सेंटीमेंट से जोड़ दो। उन्हें तो सिर्फ राजनीति दिख रही थी, लेकिन संकट की इस घड़ी में भी नीतीश कुमार सिर्फ राज्यहित देख रहे थे। उन्हें आभास था कि जब बाहर से बड़ी संख्या में लोग यहां आएंगे तो उनके साथ गलती से भी कुछ संक्रमित आ गए तो फिर ये बीमारी नए इलाकों में भी फैल जाएगी। लेकिन हुआ वही जिसकी चिंता थी। अब तो ट्रेन और बसों से लोग आने लगे। आना भी चाहिए, उनका घर है। लेकिन कुछ लोगों के साथ बीमारी भी आने लगी। फिलहाल जमुई को छोड़कर समूचे बिहार को कोरोना ने संक्रमण में ले ही लिया है। ज्यादातर वही लोग वाहक बन रहे हैं जो बाहर से आ रहे हैं। अब तो दबी जुबान में ही सही विरोधी भी यह मानने लगे हैं कि नीतीश कुमार का स्टैंड ठीक था। जो लोग जहां थे कुछ दिन और वहीं रुकते। राज्य सरकार के स्तर से सभी के खाते में एक-एक हजार रुपये डाल दिया गया था। वैश्विक संकट की इस घड़ी में जो लोग जिस प्रदेश में थे वहां की सरकार उन्हें पूरा मदद करती तो आज स्थिति कुछ और होती। लेकिन अफसोस इसी बात का है कि आज के समय में दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेताओं की भारी कमी है। लोग राजनीतिक हित देखते हैं बाकी समाज और लोगों के नुकसान से उन्हें कोई मतलब नहीं होता। लेकिन हम नीतीश कुमार जी की दूरदर्शिता को एक बार फिर सलाम करते हुए यह संकल्प लेते हैं कि आइये एक बार फिर मजबूती से साथ खड़े होकर कोरोना को भी खदेड़ दें।”

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