Ramayan के पीछे छुपे देसी टेक्निक और जुगाड़ के किस्से, जो आज भी करते हैं हैरान
90 के दशक की Ramayan आज भी सिर्फ एक टीवी शो नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का हिस्सा है—आज के हाई-टेक VFX भी इसका जादू फीका नहीं कर पाए।
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Ramanand Sagar ने बेहद सीमित संसाधनों में इस महाकाव्य को जीवंत किया, जहां तकनीक कम और देसी जुगाड़ व क्रिएटिविटी का इस्तेमाल ज्यादा हुआ।
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सुबह के दृश्यों में कोहरे का इफेक्ट दिखाने के लिए अगरबत्ती के धुएं का उपयोग किया जाता था, जिससे सीन प्राकृतिक और वास्तविक लगता था।
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फाइट सीन में खून दिखाने के लिए कॉटन को स्प्रिट गम से चिपकाकर उस पर नकली खून लगाया जाता था, ताकि दर्शकों को सीन बिल्कुल असली लगे।
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रात के आसमान, बादल और दिव्य माहौल बनाने के लिए रुई (कॉटन) का इस्तेमाल किया जाता था—एक साधारण तरीका, लेकिन असर बेहद शानदार।
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युद्ध के दृश्यों को भव्य बनाने के लिए उस दौर की सीमित तकनीक में भी ग्लास मैटिंग और खास इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया, जो आज भी प्रभावशाली लगते हैं।
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Sunil Lahri के मुताबिक, हनुमान-रावण युद्ध का सीन तेज बारिश में शूट हुआ, जहां Dara Singh ने स्टूल पर खड़े होकर सीन पूरा किया यह समर्पण का बड़ा उदाहरण है।
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भगवान शिव के तांडव जैसे भव्य सीन को शूट करने के लिए स्क्रीन और प्रोजेक्टर का सहारा लिया गया, जिससे ग्रहों और आकाश का दृश्य तैयार किया गया।
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Arun Govil को शबरी के बेर वाले सीन में खट्टे बेर खाने पड़े, क्योंकि सीजन नहीं था फिर भी उनके भाव इतने सटीक थे कि सीन अमर हो गया। यही वजह है कि यह रामायण आज भी सिर्फ देखी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है।
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