होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO ने 11 हजार नाविकों के रेस्क्यू अभियान को रोक दिया है। जानिए हमला कैसे हुआ, ईरान क्यों नाराज है, समुद्री मार्ग को लेकर विवाद क्या है और इसका वैश्विक तेल आपूर्ति पर क्या असर पड़ सकता है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। होर्मुज स्ट्रेट के पास एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने हजारों नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए चल रहे रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस फैसले के बाद फारस की खाड़ी में फंसे करीब 11 हजार नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
ड्रोन हमले के बाद रोका गया अभियान
जानकारी के अनुसार, ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा। हालांकि किसी नाविक के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के तुरंत बाद IMO ने सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक रेस्क्यू ऑपरेशन रोकने का फैसला लिया। एजेंसी का कहना है कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
11 हजार नाविक अब भी समुद्र में फंसे
संयुक्त राष्ट्र और ओमान की मदद से पिछले कई दिनों से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था। इसी योजना के तहत हजारों नाविकों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराया जाना था। अब अभियान रुकने के बाद बड़ी संख्या में नाविक समुद्र में ही फंसे हुए हैं और अगली सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
आखिर विवाद किस बात को लेकर है?
विवाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री मार्ग को लेकर है। ईरान का कहना है कि सभी जहाज केवल उसकी ओर से तय किए गए आधिकारिक समुद्री कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करें। इसके लिए पहले अनुमति लेना भी जरूरी है। वहीं संयुक्त राष्ट्र और ओमान एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग का उपयोग कर सुरक्षित निकासी अभियान चला रहे थे।
ईरान ने क्या कहा ?
ईरान की नई समुद्री प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जहाजों को केवल लारक द्वीप के पास निर्धारित आधिकारिक मार्ग से ही गुजरना चाहिए। किसी अन्य रूट का इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित जहाज के मालिक और कप्तान की होगी।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। अगर सुरक्षा संकट लंबा खिंचता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य संबंधित देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है ताकि सुरक्षित समुद्री आवाजाही जल्द बहाल की जा सके। हालांकि जब तक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक हजारों नाविकों का इंतजार जारी रह सकता है।
Published at : 26 Jun 2026, 09:19 am (IST)
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