महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ते हुए अलग समूह बनाने का फैसला किया है। बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर अपने नए समूह को मान्यता देने की मांग की है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से अलग होकर नया राजनीतिक रास्ता चुन लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपने अलग समूह को मान्यता देने की मांग की है।
इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय ताकत पर बड़ा असर पड़ सकता है और पार्टी के भविष्य को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
किन सांसदों ने किया बगावत का ऐलान?
लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपने वाले सांसदों में शामिल हैं:
संजय जाधव
संजय देशमुख
नागेश पाटिल अष्टिकर
ओमराजे निंबालकर
भाऊसाहेब वाकचौरे
संजय दीना पाटिल
इन सभी सांसदों ने अलग समूह बनाकर अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने का कदम उठाया है।
उद्धव ठाकरे के साथ बचे सिर्फ 3 सांसद
लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर चुने गए 9 सांसदों में से अब केवल 3 सांसद ही उद्धव ठाकरे के साथ खड़े बताए जा रहे हैं। 6 सांसदों के अलग होने से पार्टी की संसदीय स्थिति कमजोर हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति और महाविकास आघाड़ी की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ा सियासी तापमान
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच पहले से जारी राजनीतिक संघर्ष के बीच यह नया घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी शिवसेना में हुई बड़ी टूट ने राज्य की सत्ता का समीकरण बदल दिया था।
अब लोकसभा स्तर पर सांसदों के इस कदम को शिंदे गुट की एक और बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
अब सभी की नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी है। यदि बागी सांसदों के समूह को मान्यता मिलती है तो शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय स्थिति और कमजोर हो सकती है। वहीं यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण भी पैदा कर सकता है।
शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व का समर्थन करने से उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
Published at : 17 Jun 2026, 09:10 am (IST)
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