दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक बाजार की नजरों में है। हाल के घटनाक्रमों के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में हाल के निचले स्तर से रिकवरी देखने को मिल रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक बाजार की नजरों में है। हाल के घटनाक्रमों के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालांकि शिपिंग गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन अभी भी कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण जहाजों के बीमा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।
तेल की कीमतों में कितनी तेजी?
सोमवार सुबह के कारोबार में:
ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
WTI क्रूड में भी करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
नेचुरल गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे ऊर्जा बाजार में दबाव और बढ़ गया।
भारत के लिए फिलहाल राहत
हालिया तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी उन ऊंचे स्तरों से नीचे हैं, जहां वे कुछ समय पहले पहुंची थीं। ऐसे में भारत के लिए फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित मानी जा रही है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं, तो ईंधन आयात लागत और महंगाई पर दबाव सीमित रह सकता है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में पेट्रोल, डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
दोहा वार्ता पर टिकी वैश्विक बाजार की नजर
बाजार की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत पर टिकी हैं। कतर की राजधानी दोहा में संभावित वार्ता को तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, रूस भी ऊर्जा निर्यात से जुड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार की दिशा काफी हद तक कूटनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।
पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, यदि वार्ता सफल रहती है और क्षेत्र में स्थिरता लौटती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने की संभावना है। फिलहाल निवेशक हर नए घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
Published at : 29 Jun 2026, 08:14 am (IST)
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