स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता उस समय तनावपूर्ण हो गई जब डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध जताते हुए बैठक छोड़ दी। जानिए वार्ता में क्या हुआ और आगे क्या हैं संभावनाएं।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
स्विट्जरलैंड के जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ता उस समय तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने बातचीत के माहौल को प्रभावित कर दिया। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच करीब 80 मिनट तक चर्चा हुई, लेकिन ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरानी पक्ष ने कड़ा विरोध जताते हुए कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार कर दिया। यह बैठक मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने और हालिया अंतरिम समझौते के बाद आगे की रणनीति तय करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। हालांकि पहले ही दौर में दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आ गए।
ट्रंप के बयान से बढ़ा विवाद
बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसने अपने क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को नियंत्रित नहीं किया तो अमेरिका पहले से अधिक कड़ा कदम उठा सकता है। ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी संसद अध्यक्ष और वार्ता प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि धमकियों से ईरान की नीति नहीं बदलेगी और देश अपनी सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार है। बैठक छोड़कर बाहर निकला ईरानी प्रतिनिधिमंडल सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के बयान पर नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता कक्ष छोड़ दिया। हालांकि बाद में मध्यस्थ देशों के प्रयासों और बातचीत जारी रखने की जरूरत को देखते हुए संपर्क बना रहा। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पहले दौर की बातचीत में क्या हुआ?
ईरान ने अपनी फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों को वापस करने और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग उठाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी तेल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने के प्रारंभिक मसौदे पर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि कतर में फ्रीज किए गए लगभग 6 अरब डॉलर की राशि को लेकर भी बातचीत हुई।
वहीं अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए कि दोनों देश पुराने विवादों को पीछे छोड़कर नए सिरे से संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि अमेरिका ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि वह ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
परमाणु कार्यक्रम पर कायम है गतिरोध
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर ही बना हुआ है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपने वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी दोहराया कि उनका देश दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और राष्ट्रीय विकास से जुड़े अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा।
लेबनान संकट भी बना बड़ा मुद्दा
बैठक में लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। ईरान ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए अमेरिका पर्याप्त कदम नहीं उठा पाया है। दूसरी ओर, इजरायल ने संकेत दिया है कि दक्षिणी लेबनान में उसकी सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी। इससे क्षेत्रीय तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा असर
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में अनिश्चितता बढ़ने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। निवेशकों की चिंता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई और ब्रेंट क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत में गतिरोध जारी रहता है तो ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच अगले दौर की वार्ता कब होगी। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से संवाद पूरी तरह समाप्त करने का संकेत नहीं दिया गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत जारी रखना दोनों देशों की आवश्यकता है, लेकिन तीखे बयानों और क्षेत्रीय तनाव के बीच किसी बड़े समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
Published at : 22 Jun 2026, 09:11 am (IST)
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