सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को चेतावनी दी है। जल संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने कहा कि पानी की सुरक्षा को खतरा हुआ तो युद्ध तक की नौबत आ सकती है। जानिए पूरा मामला।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो उनका देश युद्ध का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हालिया घटनाक्रमों की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।
पहलगाम हमले के बाद बदले हालात
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। भारत का स्पष्ट रुख है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल करने पर विचार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है।
गंभीर जल संकट से जूझ रहा पाकिस्तान
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया के पीछे उसकी बिगड़ती जल स्थिति भी एक बड़ा कारण है। देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान, में पानी की भारी कमी दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख नहरों में जल उपलब्धता सामान्य से काफी कम हो गई है।
नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64% से अधिक पानी की कमी
राइस कैनाल में लगभग 38% कमी
दादू कैनाल में 80% से ज्यादा जल संकट
पानी की कमी का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत कृषि भूमि सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। देश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि जल संकट और गहराता है, तो कृषि उत्पादन में गिरावट, खाद्यान्न संकट और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं जैसे मंगल और तारबेला बांध पर भी असर पड़ सकता है, जिससे बिजली उत्पादन में कमी आने की आशंका है।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई एक ऐतिहासिक जल समझौता है। यह समझौता विश्व बैंक की मध्यस्थता में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हस्ताक्षरित हुआ था।
इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तय की गई थी। इन नदियों में सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज शामिल हैं। दशकों तक यह संधि दोनों देशों के बीच सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय समझौतों में गिनी जाती रही है, यहां तक कि कई युद्धों और राजनीतिक तनाव के बावजूद भी यह लागू रही। सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने क्षेत्रीय तनाव को नया आयाम दे दिया है। भारत जहां आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख बनाए हुए है, वहीं पाकिस्तान जल सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता लगातार उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण एशिया की कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
Published at : 22 Jun 2026, 10:21 am (IST)
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