केंद्र सरकार ने CAFE-III के नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकते हैं। नए नियमों के तहत पेट्रोल-डीजल कारों की कीमत बढ़ने की आशंका है। जानिए CAFE-III क्या है और इसका ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।
By : Admin User | Updated at : 18 Jul 2026, 03:44 pm (IST)
अगर आप आने वाले समय में नई पेट्रोल या डीजल कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE)-III के नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद वाहनों की ईंधन खपत कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकते हैं और अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेंगे।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, ये नियम 2027-28 से 2031-32 के बीच बनने या आयात होने वाली एम-1 श्रेणी की यात्री कारों पर लागू होंगे। इस श्रेणी में ड्राइवर सहित अधिकतम आठ सीटों वाली कारें शामिल हैं। नए मानकों के तहत वाहन निर्माताओं को अपनी पूरी कार लाइन-अप की औसत ईंधन खपत में लगातार सुधार करना होगा।
ड्राफ्ट के मुताबिक, वर्ष 2027-28 में औसत ईंधन खपत का लक्ष्य 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर रखा गया है, जिसे 2031-32 तक घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करना होगा। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के मानकों को भी चरणबद्ध तरीके से सख्त किया जाएगा।
सरकार ने पहली बार कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (CNF) का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत एथेनॉल, बायोफ्यूल, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी स्वच्छ तकनीकों का उपयोग करने वाले वाहनों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। इसका उद्देश्य ऑटो कंपनियों को ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
ड्राफ्ट में क्रेडिट-डेबिट सिस्टम का भी प्रावधान किया गया है। जो कंपनियां तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगी, उन्हें क्रेडिट मिलेगा। वहीं लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियों को दूसरे निर्माताओं से क्रेडिट खरीदना होगा या ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से निर्धारित कीमत पर क्रेडिट लेना पड़ेगा। इसकी शुरुआती कीमत ₹2,500 प्रति क्रेडिट तय की गई है, जो हर साल ₹500 बढ़ेगी। नियमों का पालन न करने पर कंपनियों पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
नए मानकों को पूरा करने के लिए ऑटो कंपनियों को इंजन और अन्य तकनीकों में निवेश करना पड़ेगा। इसका असर शुरुआती दौर में कुछ पेट्रोल और डीजल कारों की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, बदले में ग्राहकों को बेहतर माइलेज, कम ईंधन खर्च और पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल वाहन मिलेंगे।