भारत जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल होने जा रहा है। जींद से सोनीपत के बीच शुरू होने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से बिजली बनाकर चलती है और इससे धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
By : Admin User | Updated at : 16 Jul 2026, 05:39 pm (IST)
भारत रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू होने जा रही है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 JULY को हरी झंडी दिखाएंगे। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेनें संचालित होती हैं।
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। ट्रेन में लगे विशेष सिलेंडरों में संग्रहित हाइड्रोजन, फ्यूल सेल के भीतर हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया कर बिजली पैदा करती है। यही बिजली ट्रैक्शन मोटर को चलाती है, जिससे ट्रेन के पहिए घूमते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, इसलिए यह ट्रेन पूरी तरह जीरो कार्बन एमिशन वाली मानी जाती है।
करीब 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर यह ट्रेन शुरुआत में 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, जबकि इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है। ट्रेन में 10 कोच लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 2,600 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे। यह इसे दुनिया की अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनों से अलग बनाता है, क्योंकि अधिकांश देशों में ऐसी ट्रेनें दो या तीन कोच तक ही सीमित हैं।
ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच हैं। प्रत्येक पावर कार में फ्यूल सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर लगाए गए हैं। दोनों पावर कार मिलकर लगभग 2,400 किलोवाट (करीब 3,200 हॉर्सपावर) बिजली पैदा करती हैं, जिससे ट्रेन बिना ओवरहेड बिजली के तार और बिना डीजल इंजन के तेज़ी से दौड़ सकती है।
यह परियोजना भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्ट और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हाइड्रोजन तकनीक न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य में रेलवे को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
Published at : 16 Jul 2026, 05:39 pm (IST)