20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार 5 नए और 2 लंबित विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। जानिए किन-किन बिलों पर होगी चर्चा और विपक्ष की क्या है तैयारी।
By : Admin User | Updated at : 17 Jul 2026, 12:14 pm (IST)
नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एक ओर केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, NEET पेपर लीक, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है।
समाचार के अनुसार, केंद्र सरकार इस मानसून सत्र में लोकसभा में पांच नए विधेयक पेश कर सकती है। इनमें इनकम टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026, सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इनमें से कुछ विधेयक अध्यादेशों की जगह कानून का रूप देने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं, जबकि कुछ प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों से जुड़े हैं।
इसके अलावा सरकार दो पहले से लंबित विधेयकों को भी आगे बढ़ा सकती है। इनमें विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, जिसे मार्च 2026 में लोकसभा में पेश किया गया था, और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025, जिसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया था, शामिल हैं। ऐसे में इस सत्र में कुल सात महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद की नजर रहने वाली है।
हालांकि सरकार की ओर से जारी संभावित विधायी सूची में परिसीमन (Delimitation) विधेयक और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से जुड़ा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इन्हीं दोनों मुद्दों की हो रही है। विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इन विषयों पर आगे बढ़ सकती है। कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यदि परिसीमन विधेयक संसद में लाया जाता है तो वह उसका विरोध करेगी।
मानसून सत्र से पहले सरकार भी अपनी तैयारियों को तेज कर चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) की बैठक बुलाई गई है, जिसमें संसद के एजेंडे, विधेयकों और सदन के संचालन की रणनीति पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने 19 जुलाई को बैठक बुलाकर साझा रणनीति बनाने का फैसला किया है ताकि संसद के भीतर सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा जा सके।
इस बार का मानसून सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार जहां अपने प्रमुख विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में संसद का यह सत्र राजनीतिक टकराव, तीखी बहस और कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण बेहद अहम माना जा रहा है।
Published at : 17 Jul 2026, 12:14 pm (IST)