पद्म भूषण से सम्मानित और देश के प्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar
नई दिल्ली। देश के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पद्म भूषण से सम्मानित विद्वान और लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से देश के राजनीतिक, संसदीय और संवैधानिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
बताया गया है कि डॉ. कश्यप ने गुरुवार सुबह दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। भारतीय संविधान, संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें देश के सबसे सम्मानित संवैधानिक विशेषज्ञों में गिना जाता था।

PM मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक संदेश जारी करते हुए लिखा कि डॉ. सुभाष कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे। उन्होंने कहा कि संसदीय और संवैधानिक विमर्श में उनका योगदान देश के लिए अमूल्य रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए उनका लेखन और समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।

ओम बिरला बोले- संविधान के जीवंत विश्वकोश थे
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी डॉ. कश्यप के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. सुभाष कश्यप भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे। संवैधानिक विषयों पर उनका गहन अध्ययन, लोकसभा के महासचिव के रूप में उनकी सेवाएं और उनकी 100 से अधिक पुस्तकों ने देश की कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन दिया है।
बिरला ने कहा कि संसद, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को आम लोगों तक पहुंचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने उनके निधन को भारतीय संसदीय लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

37 वर्षों तक संसद से जुड़े रहे
10 मई 1929 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में जन्मे डॉ. कश्यप स्वतंत्रता सेनानी परिवार से संबंध रखते थे। उन्होंने 1953 में संसद सचिवालय के साथ अपने करियर की शुरुआत की और करीब 37 वर्षों तक संसद की सेवा की। वर्ष 1984 से 1990 तक वे सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे।
संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने, संसदीय सुधारों और संवैधानिक समीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान और संसदीय लोकतंत्र पर 100 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जो आज भी छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ मानी जाती हैं।
2015 में मिला था पद्म भूषण
देश और समाज के लिए उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया था। डॉ. सुभाष कश्यप का निधन भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक विमर्श के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी विद्वता और विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
Published at : 05 Jun 2026, 06:43 am (IST)
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