संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। बाद में इसे सांकेतिक विरोध बताते हुए विपक्षी दल दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
By : Admin User | Updated at : 19 Jul 2026, 01:51 pm (IST)
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई। बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ समय बाद विपक्षी नेता इसे 'सांकेतिक विरोध' बताते हुए दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ TMC के उन 20 बागी सांसदों को लेकर है, जो NCPI नाम के नए राजनीतिक समूह से जुड़ चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि इन सांसदों के अलग गुट के रूप में विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और इनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें अलग दल मानकर सर्वदलीय बैठक में बुलाना नियमों के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि टेबल ऑफिस द्वारा जारी सूची में TMC के सांसदों की संख्या गलत दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन सांसदों को किस आधार पर अलग पहचान देकर बैठक में बुलाया गया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
बैठक से बाहर आने के बाद कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह संविधान और संसदीय परंपराओं के खिलाफ कदम है। वहीं, शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने सवाल उठाया कि बागी सांसदों को अलग संबद्धता देने का कानूनी आधार क्या है। AAP सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके दल के राज्यसभा सांसदों के मामले में भी याचिका लंबित होने के बावजूद अलग सीटें आवंटित कर दी गईं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।
बागी सांसदों ने दिया जवाब
दूसरी ओर, NCPI में शामिल हुईं पूर्व TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने क्षेत्र का विकास करना है। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंपे जा रहे हैं और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
फिर बैठक में लौटा विपक्ष
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि उनका वॉकआउट केवल सरकार के फैसले के विरोध में एक सांकेतिक कदम था। बाद में सभी विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक में लौट आए और कहा कि वे संसद के मॉनसून सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।