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ट्रंप के ₹125 लाख करोड़ : रक्षा बजट पर विवाद,अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले फिर से दुनिया में धाक जमानी है
1.5 ट्रिलियन डॉलर का वॉरफाइटिंग बजट ड्रोन, मिसाइल डिफेंस और न्यूक्लियर ताकत पर बड़ा फोकस

अमेरिका के रक्षा बजट को लेकर बहस तेज हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप के 1.5 ट्रिलियन डॉलर डिफेंस प्लान का बचाव करते हुए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे “वॉरफाइटिंग बजट” बताया है।

ट्रंप के ₹125 लाख करोड़ : रक्षा बजट पर विवाद,अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले  फिर से दुनिया में धाक जमानी है

Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा प्रस्तावित विशाल रक्षा बजट को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक बहस तेज हो गई है। यह बजट लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹125 लाख करोड़) का बताया जा रहा है, जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस बजट का बचाव करते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने इसे “वॉरफाइटिंग बजट” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट किसी सामान्य खर्च का हिस्सा नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालातों में अमेरिका की सैन्य ताकत को फिर से मजबूत करने की योजना है।

जेनरेशनल रिसेट” का दावा: हेगसेथ ने इस बजट को अमेरिकी सैन्य शक्ति का “जेनरेशनल रिसेट” बताया। उनका कहना है कि वर्षों से चली आ रही कम निवेश और पुरानी नीतियों को बदलना जरूरी है ताकि सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।
सैनिकों के वेतन और बुनियादी ढांचे पर फोकस:बजट में जूनियर सैनिकों के वेतन में लगभग 7% बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। इसके अलावा पुराने और जर्जर सैन्य बैरकों को हटाकर नए ढांचे बनाने की योजना भी शामिल है।

डिफेंस सिस्टम में बड़ा बदलाव: पेंटागन की खरीद प्रणाली को भी पूरी तरह बदला जा रहा है। इसे पारंपरिक “ब्यूरोक्रेटिक मॉडल” से हटाकर “बिजनेस मॉडल” पर लाने की बात कही गई है, ताकि तेज और कम लागत में नतीजे मिल सकें।

नई तकनीक पर जोर:इस बजट में ड्रोन तकनीक, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और परमाणु हथियारों की क्षमता को मजबूत करने पर खास फोकस किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य स्थिति फिर से मजबूत होगी।

70,000 नौकरियों का दावा: हेगसेथ के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश से लगभग 70,000 नई नौकरियां और 280 नई सैन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

विवाद और सवाल: हालांकि इस विशाल बजट को लेकर कई विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी राशि वास्तव में जरूरी है या यह केवल सैन्य विस्तार की नीति है।