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ट्रम्प को अमेरिका में बड़ा झटका : फेडरल कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया
अदालत की दोटूक टिप्पणी- राष्ट्रपति ने अधिकारों का किया गलत इस्तेमाल,व्यापार नीति पर उठे बड़े सवाल

अमेरिका की एक फेडरल ट्रेड अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध घोषित कर दिया है। अदालत ने माना कि ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का इस्तेमाल इस मामले में सही तरीके से नहीं किया गया और कांग्रेस की अनुमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू करना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। फैसले के बाद छोटे अमेरिकी व्यापारियों और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों ने राहत की सांस ली है। वहीं, भारत सहित कई निर्यातक देशों के लिए इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ट्रम्प को अमेरिका में बड़ा झटका : फेडरल कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया

Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)

अमेरिका की फेडरल ट्रेड कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 10% ग्लोबल टैरिफ नीति को कानूनी रूप से अमान्य करार देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 2-1 के बहुमत से कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया और राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी इतने व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं था।

यह मामला तब चर्चा में आया था जब ट्रम्प प्रशासन ने फरवरी में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए दुनिया भर से आने वाले कई उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। प्रशासन का कहना था कि अमेरिका बढ़ते व्यापार घाटे और करंट अकाउंट डेफिसिट जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए यह कदम जरूरी था।
हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जजों ने कहा कि केवल व्यापार घाटा बढ़ना किसी राष्ट्रीय आर्थिक आपातस्थिति के बराबर नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, कानून में जिन परिस्थितियों में अस्थायी टैरिफ लगाने की अनुमति दी गई है, यह मामला उन शर्तों को पूरा नहीं करता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने कांग्रेस द्वारा तय सीमाओं का उल्लंघन किया है। हालांकि तीन जजों की पीठ में शामिल एक सदस्य ने असहमति जताते हुए माना कि व्यापारिक मामलों में राष्ट्रपति को अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इस फैसले का अमेरिकी छोटे कारोबारियों और आयात-निर्यात कंपनियों ने स्वागत किया है। कई कंपनियों का कहना था कि अचानक लगाए गए अतिरिक्त शुल्क के कारण उनकी लागत बढ़ गई थी और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही थी खिलौना उद्योग से जुड़े एक प्रमुख कारोबारी ने इसे छोटे व्यापारियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बड़ी जीत बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। भारत जैसे देशों के लिए भी यह राहत भरी खबर हो सकती है। यदि अमेरिकी टैरिफ नीति पर कानूनी रोक बनी रहती है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त लागत का खतरा कम होगा और व्यापारिक स्थिरता बनी रह सकती है।

अब माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है। मामला पहले यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट में जाएगा और जरूरत पड़ने पर यह फिर से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।
ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को सीमित समय के लिए अस्थायी टैरिफ लगाने की अनुमति देती है, लेकिन इसका उपयोग केवल गंभीर भुगतान संतुलन संकट या मुद्रा स्थिरता पर खतरे जैसी स्थितियों में ही किया जा सकता है। अदालत ने साफ किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां उस स्तर की नहीं थीं, जिनके आधार पर इतना बड़ा कदम उठाया जाए।