गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का भी आदेश दिया।
By : Admin User | Updated at : 07 Jul 2026, 12:00 pm (IST)
वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत (स्पेशल कोर्ट) के निर्णय को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को कायम रखा। इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलें खारिज कर दी गईं। अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
मार्च 2025 से चल रही थी नियमित सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन किया था। मार्च 2025 से इस केस की नियमित सुनवाई की जा रही थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि की मांग की, जबकि दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
स्पेशल कोर्ट ने 2022 में सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
इससे पहले 18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण 28 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह पहला मामला माना गया था, जिसमें एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं होती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष लंबित था।
26 जुलाई 2008 को दहला था अहमदाबाद
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में करीब 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच के अनुसार, विस्फोटकों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाकर शहर के विभिन्न इलाकों में रखा गया था। धमाकों का निशाना भीड़भाड़ वाले बाजार, बसें और अस्पताल तक बने थे। घटना के बाद अहमदाबाद और सूरत से कई जिंदा बम भी बरामद किए गए थे।
इंडियन मुजाहिदीन पर लगा था जिम्मेदारी का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। जांच में यह भी सामने आया था कि हमलों को वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के कथित प्रतिशोध के रूप में अंजाम देने की साजिश रची गई थी।
35 मामलों की हुई थी संयुक्त सुनवाई
इस मामले में जांच एजेंसियों ने 78 लोगों को आरोपी बनाया था और कुल 35 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। इन सभी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया गया था। करीब 14 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान 1,150 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। स्पेशल कोर्ट ने 8 फरवरी 2022 को लगभग 6,700 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया था। अब गुजरात हाईकोर्ट ने उस फैसले को बरकरार रखते हुए दोषियों की अपीलें खारिज कर दी हैं और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
Published at : 07 Jul 2026, 12:00 pm (IST)
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