छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई उन्होंने अपनी दमदार प्रस्तुति और अद्भुत अभिनय शैली के माध्यम से पंडवानी लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके निधन से भारतीय लोक कला और संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
By : Admin User | Updated at : 05 Jul 2026, 10:02 am (IST)
भारतीय लोक कला जगत की महान हस्ती, पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रायपुर स्थित AIIMS में निधन हो गया। वे पिछले कई सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं और शनिवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि AIIMS रायपुर के जनसंपर्क विभाग ने की। इस दुखद समाचार से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी गायन शैली को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने उनके निधन को भारतीय कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शोक संतप्त परिवार तथा उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
साल 1956 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी डॉ. तीजन बाई ने कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता का असाधारण सफर तय किया। उन्होंने उस समय पंडवानी की 'कापालिक शैली' को अपनाया, जब इस शैली में मुख्य रूप से पुरुष कलाकारों का वर्चस्व था। अपनी प्रभावशाली आवाज, सशक्त अभिनय और तंबूरा के साथ जीवंत मंच प्रस्तुतियों ने उन्हें देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाई।
पांच दशकों से अधिक लंबे अपने कलात्मक जीवन में उन्होंने एशिया, यूरोप और दुनिया के अनेक देशों में भारतीय लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने न केवल पंडवानी परंपरा को संरक्षित किया, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों को भी प्रेरित किया। लोक कला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला की एक अमूल्य विरासत का अंत नहीं, बल्कि उस प्रेरणादायक यात्रा की याद है जिसने पंडवानी को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
Published at : 05 Jul 2026, 10:02 am (IST)
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