बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर माता-पिता अपनी संपत्ति बच्चों को इस शर्त पर देते हैं कि वे बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगे और बच्चे ऐसा नहीं करते, तो माता-पिता उस संपत्ति को वापस हासिल कर सकते हैं। यह फैसला लोअर परेल के एक फ्लैट विवाद मामले में आया है।
By : Admin User | Updated at : 09 Jul 2026, 01:30 pm (IST)
यह मामला मुंबई के लोअर परेल इलाके के एक फ्लैट से जुड़ा हुआ है। सुनवाई के दौरान एक बेटे ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपने 68 वर्षीय पिता को फ्लैट का कब्जा वापस सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
मामले के अनुसार, पिता एक जौहरी हैं और उन्होंने साल 2005 में यह फ्लैट खरीदा था। वह अपनी पत्नी, बेटे और परिवार के साथ इसी घर में रहते थे। बाद में 8 मई 2023 को उन्होंने एक गिफ्ट डीड के माध्यम से यह फ्लैट बेटे के नाम कर दिया। इस संपत्ति हस्तांतरण के दौरान शर्त रखी गई थी कि बेटा अपने माता-पिता को रहने, खाने और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा और जीवनभर उनकी देखभाल करेगा, लेकिन कुछ समय बाद पिता और बेटे के बीच रिश्तों में खटास आ गई। पिता का आरोप था कि बेटे ने उनकी देखभाल करना बंद कर दिया और घर का माहौल इतना खराब हो गया कि उन्हें अपनी पत्नी के साथ घर छोड़ना पड़ा।
इसके बाद बुजुर्ग दंपति ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बने ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने बेटे और उसके परिवार को 60 दिनों के अंदर फ्लैट खाली कर माता-पिता को वापस सौंपने का आदेश दिया।
बेटे ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि उसके पिता आर्थिक रूप से मजबूत हैं, उनका खुद का व्यवसाय है और उनके पास दूसरी संपत्तियां भी मौजूद हैं। इसलिए संपत्ति वापस लेने का आधार नहीं बनता।
हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेटे की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति इस अधिकार को खत्म नहीं करती। यदि संपत्ति देते समय रखी गई देखभाल की शर्त पूरी नहीं होती है, तो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 की धारा 23 के तहत संपत्ति का हस्तांतरण रद्द किया जा सकता है।
Published at : 09 Jul 2026, 12:27 pm (IST)
Tags : #court, Supreme court
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