पिछले वर्ष की तुलना में एक स्थान नीचे है। यह रैंकिंग वीजा-फ्री यात्रा, वीजा-ऑन-अराइवल, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक ताकत जैसे कई मानकों के आधार पर तय की जाती है। रिपोर्ट में स्वीडन को सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट वाला देश बताया गया है।
By : Admin User | Updated at : 07 Jul 2026, 03:18 pm (IST)
ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस की ओर से जारी ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। नई रिपोर्ट के अनुसार भारत एक पायदान फिसलकर 125वें स्थान पर पहुंच गया है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक मौजूदगी लगातार मजबूत कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत केवल उसके नागरिकों की यात्रा की सुविधा से नहीं, बल्कि उस देश के वैश्विक प्रभाव, कूटनीतिक संबंधों, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी तय होती है। इस वर्ष की रैंकिंग में स्वीडन को दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट मिला है, जबकि अफगानिस्तान सूची में सबसे निचले स्थान पर है।
पासपोर्ट रैंकिंग का सबसे महत्वपूर्ण आधार वीजा-फ्री यात्रा है। यदि किसी देश के नागरिक बिना पहले से वीजा लिए दूसरे देश में प्रवेश कर सकते हैं, तो उसे अधिक अंक मिलते हैं। इसके अलावा वीजा-ऑन-अराइवल, इलेक्ट्रॉनिक वीजा (e-Visa) की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सहजता और विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते भी रैंकिंग को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट की रैंकिंग किसी देश की वैश्विक स्वीकार्यता और नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में आई यह गिरावट भविष्य में भारत के कूटनीतिक और यात्रा संबंधी समझौतों को और मजबूत करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती है।
Published at : 07 Jul 2026, 03:18 pm (IST)
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