ISRO ने ‘मिशन मित्र’ लॉन्च कर गगनयात्रियों की सुरक्षा और मानसिक-शारीरिक क्षमता को परखना शुरू किया। जानिए कैसे काम करता है यह मिशन।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन को और सुरक्षित बनाने की दिशा में ISRO ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘मिशन मित्र’ के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों यानी ‘गगनयात्रियों’ की सुरक्षा, मानसिक मजबूती और शारीरिक क्षमता को परखा जा रहा है।
यह मिशन Gaganyaan की तैयारी का अहम हिस्सा है, जिसमें पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। ऐसे में क्रू की हर स्थिति में तैयार रहना बेहद जरूरी है।
इस खास मिशन का आयोजन लद्दाख के लेह में किया गया, जहां लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और बेहद ठंडा मौसम अंतरिक्ष जैसे हालात पैदा करता है। इन परिस्थितियों में गगनयात्रियों के व्यवहार, सहनशक्ति और काम करने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
‘मिशन मित्र’ दरअसल एक एनालॉग मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष जैसे माहौल में क्रू की प्रतिक्रिया और प्रदर्शन को समझा जाता है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि कठिन और अलग-थलग परिस्थितियों में टीम कैसे काम करती है और कैसे फैसले लेती है।
इस मिशन में खास तौर पर क्रू के बीच तालमेल, संचार क्षमता और तनाव से निपटने की ताकत पर ध्यान दिया गया। अंतरिक्ष में सीमित संसाधनों के बीच काम करते समय इन सभी पहलुओं का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है।
साथ ही, गगनयात्रियों की शारीरिक सहनशक्ति भी जांची गई, क्योंकि कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड में लंबे समय तक काम करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
इस मिशन को ISRO और भारतीय वायुसेना के एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान ने मिलकर डिजाइन किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष मिशन के दौरान क्रू पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम रहे।
‘मिशन मित्र’ से मिले अनुभव और डेटा भविष्य में Gaganyaan को और ज्यादा सुरक्षित और सफल बनाने में मदद करेंगे। यह पहल भारत की अंतरिक्ष यात्रा को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Published at : 04 Apr 2026, 01:20 pm (IST)
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