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होम / राष्ट्रीय / रुपये का रिवर्स अटैक! RBI के मास्टरस्ट्रोक से 12 साल की सबसे बड़ी छलांग, क्या डगमगाएगी डॉलर की बादशाहत?
रुपये का रिवर्स अटैक! RBI के मास्टरस्ट्रोक से 12 साल की सबसे बड़ी छलांग, क्या डगमगाएगी डॉलर की बादशाहत?
NDD पर रोक और सट्टेबाजी नियंत्रण से रुपये में 12 साल की सबसे बड़ी तेजी, वैश्विक बाजार में नई बहस

RBI के हालिया फैसलों ने रुपये को गिरावट से उबारते हुए मजबूत किया है। NDD कॉन्ट्रैक्ट्स पर रोक और फॉरेक्स बाजार में नियंत्रण के चलते रुपये में ऐतिहासिक तेजी आई है, जिससे डॉलर के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।

रुपये का रिवर्स अटैक!  RBI के मास्टरस्ट्रोक से 12 साल की सबसे बड़ी छलांग, क्या डगमगाएगी डॉलर की बादशाहत?

Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)

Source : RASHTRIYA SAMACHAR

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच Reserve Bank of India (RBI) के हालिया कदमों ने भारतीय रुपये को नई मजबूती दी है। Iran–Israel conflict और वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के कारण जहां दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं, वहीं भारतीय मुद्रा भी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रही थी।

RBI बना ‘संकटमोचक’

अप्रैल 2026 को RBI द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के बाद बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कुछ ही घंटों में रुपये में तेज रिकवरी आई और शेयर बाजार भी संभल गया। NIFTY 50 और BSE Sensex दोनों में मजबूती लौटी, जबकि अन्य एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल बना हुआ था।

12 साल की सबसे बड़ी तेजी

RBI ने बैंकों को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव (NDD) कॉन्ट्रैक्ट्स से दूर रहने के निर्देश दिए।

  • रुपया 95 के स्तर से उभरकर 93.10 तक पहुंच गया
  • एक दिन में करीब 1.73 रुपये की मजबूती
  • 12 साल की सबसे बड़ी एकदिवसीय तेजी

क्या होता है NDD बाजार?

NDD (Non-Deliverable Derivatives) ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिनमें वास्तविक मुद्रा का लेन-देन नहीं होता। ये आमतौर पर सिंगापुर, हांगकांग, लंदन और दुबई जैसे विदेशी बाजारों में ट्रेड होते हैं। इनमें निवेशक भविष्य के विनिमय दर पर सट्टा लगाते हैं और अंतर को कैश में सेटल करते हैं। लंबे समय से इन पर आरोप लगते रहे हैं कि ये असली बाजार को प्रभावित करते हैं और मुद्रा की कीमत में अस्थिरता पैदा करते हैं।

आगे रुपये का क्या होगा?

  • अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहीं, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जोखिम पैदा कर सकती है
  • बेहतर हालात में रुपया ₹90–₹92 तक मजबूत हो सकता है
  • खराब स्थिति में ₹100 तक कमजोर होने की आशंका

हालांकि RBI के पास मजबूत फॉरेक्स रिजर्व है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

आम लोगों पर क्या असर?

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत
  • मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते
  • महंगाई पर नियंत्रण

लेकिन नुकसान भी:

  • निर्यात महंगा हो सकता है
  • भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा घट सकती है

क्या डॉलर की ताकत घटेगी?

लंबे समय से वैश्विक व्यापार में US Dollar का दबदबा रहा है।

लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने नई बहस छेड़ दी है।
Iran
ने संकेत दिया है कि तेल व्यापार में डॉलर की जगह Chinese Yuan का उपयोग किया जा सकता है।

यह बदलाव वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करता है और डॉलर की भविष्य की स्थिति पर सवाल खड़े करता है।RBI के सख्त कदमों ने फिलहाल रुपये को मजबूती दी है और बाजार में स्थिरता लौटाई है। हालांकि, वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रुपया अपनी मजबूती बनाए रख पाता है और क्या डॉलर का वर्चस्व वास्तव में चुनौती में आता है।