सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख की ठंड से निकलकर दिल्ली की भीषण गर्मी में 26 दिन तक भूख हड़ताल करना उनके लिए बेहद कठिन रहा। इसके बावजूद जब उन्होंने सरकार के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया, तो सोशल मीडिया पर उन पर समझौता करने और गुप्त डील करने जैसे आरोप लगाए जाने लगे।
By : Admin User | Updated at : 25 Jul 2026, 10:58 am (IST)
26 दिनों तक चली भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पहली बार अपनी स्वास्थ्य स्थिति और ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने बताया कि लंबे अनशन की वजह से उनका 11 किलो वजन कम हो गया, शरीर की मांसपेशियां लगभग खत्म हो गईं और कई महत्वपूर्ण अंगों के साथ-साथ दिमाग पर भी गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के अनुसार कुछ नुकसान ऐसे हैं जो शायद पूरी तरह ठीक नहीं हो पाएंगे।
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख की ठंड से निकलकर दिल्ली की भीषण गर्मी में 26 दिन तक भूख हड़ताल करना उनके लिए बेहद कठिन रहा। इसके बावजूद जब उन्होंने सरकार के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया, तो सोशल मीडिया पर उन पर समझौता करने और गुप्त डील करने जैसे आरोप लगाए जाने लगे।
उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनका फैसला किसी निजी समझौते का हिस्सा नहीं था, बल्कि छात्रों और युवाओं को कानूनी परेशानियों से बचाने के उद्देश्य से लिया गया था। वांगचुक ने भावुक होकर कहा कि अगर उन्हें समझौता ही करना होता तो वे 26 दिनों तक भूख हड़ताल क्यों करते।
ट्रोलर्स को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "क्या 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी मुझे अपनी ईमानदारी साबित करनी पड़ेगी? क्या मुझे यह बताना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था और मैंने किसके हाथों से इसे क्यों समाप्त किया?" उन्होंने कहा कि उनके त्याग और बलिदान पर सवाल उठाना बेहद दुखद है और यह उनके संघर्ष की भावना का अपमान है।
Published at : 25 Jul 2026, 10:58 am (IST)
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