26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने पर अनशन समाप्त कर दिया। जानिए सरकार ने क्या वादे किए, किन मांगों पर बनी सहमति और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर क्या कहा।
By : Admin User | Updated at : 24 Jul 2026, 12:33 pm (IST)
26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद वांगचुक ने जूस पीकर अनशन तोड़ा। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबी बातचीत, लिखित भरोसे और देश में संभावित तनाव को देखते हुए लिया गया है।
वीडियो संदेश जारी कर सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत चल रही थी। उनका कहना था कि वे केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन चाहते थे और सरकार ने अंततः उनकी यह मांग स्वीकार कर ली। सरकार की ओर से सबसे बड़ा आश्वासन यह दिया गया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों, युवाओं और 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके अलावा, पेपर लीक प्रकरण में जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा देने का भी वादा किया गया है।
सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने यह भी भरोसा दिया है कि पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। इस पर वांगचुक ने कहा कि इस्तीफा उनकी एक मांग जरूर थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना और निर्दोष युवाओं पर कार्रवाई रोकना था।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो इससे छात्रों का नहीं, बल्कि सरकार की छवि का नुकसान होगा। उनका मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर समय रहते उचित निर्णय लेना चाहिए था। अपने संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने आंदोलन का समर्थन करने वाले छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है।
Published at : 24 Jul 2026, 12:33 pm (IST)