पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सूरत के एक व्यापारी ने अपने साथ ₹5 लाख की ऑनलाइन ठगी होने की शिकायत दर्ज कराई।फर्जी APK इंस्टॉल होते ही अपराधी पीड़ित के मोबाइल में मौजूद SMS, OTP, बैंकिंग डिटेल्स, फोटो, कॉन्टैक्ट्स और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया जाता था।
By : Admin User | Updated at : 22 Jul 2026, 04:41 pm (IST)
देशभर में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का सूरत साइबर क्राइम सेल ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी 18 वर्षीय रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था, जिनकी मदद से हजारों लोगों के मोबाइल फोन हैक किए गए और उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
सूरत के व्यापारी से ठगी के बाद खुला मामला
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सूरत के एक व्यापारी ने अपने साथ ₹5 लाख की ऑनलाइन ठगी होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल और साइबर फॉरेंसिक जांच के दौरान पुलिस को एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क का पता चला।
डीसीपी विशाखा जैन के निर्देशन में साइबर सेल की विशेष टीम उत्तर प्रदेश के कानपुर पहुंची। कई दिनों तक तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद आरोपी रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य को गिरफ्तार कर सूरत लाया गया।
121 फर्जी APK ऐप तैयार किए
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी ने PNB One सहित कुल 121 फर्जी APK एप्लिकेशन तैयार किए थे। इन ऐप्स को देखने में बिल्कुल असली बैंकिंग और सरकारी सेवाओं के मोबाइल ऐप जैसा बनाया गया था।
इन फर्जी ऐप्स को बैंक, KYC अपडेट, RTO, बिजली बिल, सरकारी योजना और अन्य जरूरी सेवाओं के नाम पर व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इन APK फाइलों को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, साइबर अपराधियों को उस डिवाइस का पूरा एक्सेस मिल जाता था।
मोबाइल हैक कर खाली किए बैंक खाते
फर्जी APK इंस्टॉल होते ही अपराधी पीड़ित के मोबाइल में मौजूद SMS, OTP, बैंकिंग डिटेल्स, फोटो, कॉन्टैक्ट्स और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया जाता था।
जांच के दौरान सामने आया कि इन फर्जी APK फाइलों को 21,672 मोबाइल फोन में इंस्टॉल कराया गया। इनमें से 2,928 मोबाइल पूरी तरह हैक हो गए। इन्हीं हैक किए गए डिवाइसों का इस्तेमाल कर देशभर में करीब ₹64.38 करोड़ की साइबर ठगी की गई।
लोगों के लिए साइबर सुरक्षा सलाह
सूरत पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक, KYC अपडेट, RTO, बिजली बिल या किसी सरकारी संस्था के नाम पर भेजी गई APK फाइल या संदिग्ध लिंक को कभी डाउनलोड न करें। किसी भी अनजान ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता और जागरूकता ही इस तरह की ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
Published at : 22 Jul 2026, 04:39 pm (IST)