गुजरात वन विभाग द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत यह सफल स्थानांतरण पूरा किया गया। अधिकारियों के अनुसार, जब जंगलों में तेंदुओं और अन्य मांसाहारी जीवों के लिए प्राकृतिक शिकार की पर्याप्त उपलब्धता होगी, तो वे भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों या गांवों का रुख नहीं करेंगे।
By : Admin User | Updated at : 22 Jul 2026, 07:36 pm (IST)
सूरत (गुजरात)। गुजरात वन विभाग ने सूरत जिले (मांडवी रेंज) के जंगलों में तेंदुए जैसे मांसाहारी वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 50 चित्तलों (चीतल/चितकबरे हिरण) का सफलतापूर्वक स्थानांतरण (Translocation) किया है। इस वैज्ञानिक पहल का मुख्य उद्देश्य जंगलों में शिकार का आधार बढ़ाना, खाद्य चक्र को मजबूत करना और मानव बस्तियों को वन्यजीवों के हमलों से सुरक्षित रखना है।
गुजरात वन विभाग द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत यह सफल स्थानांतरण पूरा किया गया। अधिकारियों के अनुसार, जब जंगलों में तेंदुओं और अन्य मांसाहारी जीवों के लिए प्राकृतिक शिकार की पर्याप्त उपलब्धता होगी, तो वे भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों या गांवों का रुख नहीं करेंगे। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आएगी और जंगल का पारिस्थितिक संतुलन (Ecosystem Balance) अधिक समृद्ध होगा।
24x7 तैनात रहेगी त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT)-
वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति या कटोकटी से त्वरित और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वन विभाग ने अत्याधुनिक उपकरणों से लैस क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी तैनात किया है। यह समर्पित टीम मानव जीवन और वन्यजीवों—दोनों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे और सातों दिन (24×7) तत्पर रहेगी।पहल: सूरत (मांडवी) के जंगलों में 50 चित्तलों का सफल स्थानांतरण।
उद्देश्य: तेंदुओं के लिए प्राकृतिक भोजन बढ़ाना और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना।
कानूनी प्रावधान: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई।
सुरक्षा व्यवस्था: आपात स्थिति के लिए 24×7 आधुनिक क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात।
Published at : 22 Jul 2026, 07:36 pm (IST)