नए कानून के तहत आरक्षण को 10% से घटाकर 7% कर दिया गया है। यह बदलाव कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश और नए वर्गीकरण के आधार पर किया गया है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित कर दिए हैं। नए कानून के अनुसार, OBC सूची में शामिल 77 मुस्लिम समुदायों को सूची से बाहर कर दिया गया है। यह फैसला कलकत्ता हाई कोर्ट के मई 2024 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें बिना उचित सर्वेक्षण के OBC सूची में शामिल किए गए समुदायों की मान्यता पर सवाल उठाए गए थे।
इसके साथ ही राज्य में OBC आरक्षण का प्रतिशत 10% से घटाकर 7% कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि अब केवल सर्वेक्षण और सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन के आधार पर पात्र समुदायों को ही OBC सूची में शामिल किया जाएगा। राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग को समुदायों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बिना वैज्ञानिक सर्वेक्षण के कुछ मुस्लिम समुदायों को OBC सूची में शामिल किया था। उन्होंने दावा किया कि नए संशोधन से OBC प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और आरक्षण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। सरकार ने यह भी कहा कि सर्वेक्षण के आधार पर शामिल 66 समुदायों की मान्यता बरकरार रखी गई है।
हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया। आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि आरक्षण में किसी भी बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ठोस आंकड़ों और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता होती है। उनका आरोप है कि पर्याप्त डेटा के बिना आरक्षण को 7% करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे पिछड़े वर्ग के लोगों के शिक्षा और सरकारी नौकरियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
यह विधेयक पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है और आने वाले समय में इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
Published at : 01 Jul 2026, 04:52 am (IST)
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