देश के प्रमुख बैंक और टेलीकॉम कंपनियां डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित और आसान बनाने के लिए ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक पर काम कर रही हैं। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए OTP की जरूरत खत्म हो सकती है, जिससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा और फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक पर काम कर रही हैं, जो ऑनलाइन पेमेंट के दौरान OTP की आवश्यकता को समाप्त कर सकती है।
इस तकनीक के तहत सिस्टम बैकग्राउंड में ही यह वेरिफाई करेगा कि बैंक ऐप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और फोन में इस्तेमाल हो रहा सिम कार्ड एक ही है या नहीं। यदि सिम और नंबर में कोई मिसमैच पाया जाता है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में यूजर को कोई भी अतिरिक्त स्टेप नहीं लेना होगा।
यह नई तकनीकesim पर भी प्रभावी ढंग से काम करेगी, जिससे सिम क्लोनिंग और eSIM स्वैप जैसे फ्रॉड पर रोक लगाई जा सकेगी। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम संभावित धोखाधड़ी को बिना यूजर को परेशान किए पहचानने में सक्षम होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस्तेमाल की जा रही कई सुरक्षा परतें हैकर्स के लिए आसान लक्ष्य बन चुकी थीं। ऐसे में अब वेरिफिकेशन प्रक्रिया को नेटवर्क के कोर स्तर पर शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे इसे और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। यह सिस्टम पूरी तरह बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे यूजर या हैकर सीधे एक्सेस नहीं कर पाएंगे।सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए इसमें फेस ID, ऐप-आधारित कोड जनरेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जैसे फीचर्स भी जोड़े जा सकते हैं।इसी बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को अनिवार्य कर रखा है। इसमें पासवर्ड या पिन, OTP या ऐप कोड, और बायोमेट्रिक्स जैसे विभिन्न स्तर शामिल हैं। हालांकि SMS आधारित OTP सिस्टम जारी रहेगा, लेकिन बैंकों को आधुनिक और अधिक सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।नई व्यवस्था के तहत अब बैंक OTP भेजने के लिए व्हाट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे ट्रांजैक्शन फेल होने की दर कम होगी और यूजर एक्सपीरियंस बेहतर बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को भी नई गति मिलेगी। आसान और सुरक्षित चेकआउट प्रक्रिया से डिजिटल ट्रांजैक्शन का दायरा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
Published at : 03 Apr 2026, 07:21 am (IST)
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