आंकड़ों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में अमेरिकी दालों की खेप में साफ गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय आयातक अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से सस्ती दालें खरीदने की ओर बढ़ रहे हैं
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार तनाव का असर अब कृषि क्षेत्र में भी दिखने लगा है। अमेरिकी भारत की ओर से भी अमेरिकी दालों पर लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क से अमेरिका के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे जिससे दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार वार्ता जटिल हो गई है। अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप से यह टैरिफ हटाने की अपील की है, इससे अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। इस टैरिफ का सबसे पहला असर अमेरिका से भारत आने वाले दाल निर्यात पर पड़ा है. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में अमेरिकी दालों की खेप में साफ गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय आयातक अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से सस्ती दालें खरीदने की ओर बढ़ रहे हैं
अमेरिकी सांसदों ने लेटर लिखा -
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,अमेरिका के दो प्रभावी सांसदों, नार्थ डकोटा के केविन क्रेमर और मोंटाना के स्टीव डेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर टैरिफ हटाने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत निर्णय से अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान हो रहा है, विशेषकर उन राज्यों के किसानों को जो मटर और दालों के प्रमुख उत्पादक हैं। पत्र में सांसदों ने जोर दिया कि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा बाजार है, जिसकी वैश्विक खपत में लगभग 27 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बावजूद अमेरिकी पीली दालों पर ऊंचा शुल्क लगाया जाना अनुचित है। उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया कि किसी भी नए व्यापार समझौते से पहले अमेरिकी दालों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाए।
गौरतलब है कि भारत में सबसे ज्यादा खपत होनेवाली दालों में मसूर,चना,सूखी फलियां और मटर शामिल हैं। इसके बावजूद भारत ने अमेरिकी दालों पर भारी टैरिफ लगाया है। बता दें कि 2019 में भारत द्वारा अमेरिकी दलहन फसलों को जनरलाइज्ड सिस्टम आफ प्रेफरेंसेज से हटाए जाने के बाद से यह विवाद लगातार गहराता रहा है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी यह मुद्दा उठाया गया था और 2020 की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र सौंपा गया था।
क्या है दाल व्यापार और टैरिफ -
भारत में दालें रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। मानसून की अनिश्चितता और सीमित कृषि भूमि के कारण घरेलू उत्पादन अक्सर मांग से कम रहता है। इस कारण भारत हर साल लाखों टन दालों का आयात करता है। अमेरिका हाल के वर्षों में भारत का बड़ा सप्लायर बनकर उभरा था। 30 प्रतिशत शुल्क लगने से अमेरिकी दालें अचानक महंगी हो गई हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर पड़ गई है।
Published at : 20 Jan 2026, 07:15 pm (IST)
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