अदालत ने ASI को परिसर में किसी भी तरह का ढांचागत बदलाव नहीं करने का निर्देश दिया है और नमाज के लिए आसपास वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार करने को कहा है। मामले में हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ASI को नोटिस जारी किया गया है।
By : Admin User | Updated at : 14 Jul 2026, 05:26 pm (IST)
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार का ढांचागत या संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल परिसर के भीतर शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने सुझाव दिया कि अंतिम निर्णय आने तक हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए भोजशाला परिसर के आसपास किसी उपयुक्त वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या परिसर के निकट ऐसी कोई जगह उपलब्ध कराई जा सकती है, जहां मुस्लिम समुदाय नमाज अदा कर सके। अदालत ने यह भी कहा कि इससे पहले बसंत पंचमी के अवसर पर दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आ चुका है, इसलिए परिस्थितियां अलग हैं।
मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि पिछले लगभग 40 वर्षों से भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा की जाती रही है और अब उस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए पुरानी स्थिति बहाल करने की मांग की। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी सवाल उठाए, जिसमें लंदन के संग्रहालय से वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा भारत वापस लाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस जॉयमाला बागची ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि कोई संवैधानिक अदालत इस प्रकार का आदेश किस आधार पर दे सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार भोजशाला परिसर में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी, ASI कोई संरचनात्मक परिवर्तन नहीं करेगा और नमाज के लिए परिसर के भीतर अनुमति नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई में अदालत सभी पक्षों के जवाब और दलीलों पर आगे विचार करेगी।
Published at : 14 Jul 2026, 05:26 pm (IST)