सर्जरी के बाद तेजी से रिकवरी होने लगी। छह दिन बाद बुजुर्ग विदेशी महिला को डिस्चार्ज किया गया तो वह हॉस्पिटल से नाचते-गाते अपने देश रवाना हुई। डिस्चार्ज के समय महिला भावुक हो गई और भारतीय डॉक्टरों का आभार जताते हुए खुशी से नाचती नजर आईं। यह दृश्य अस्पताल स्टाफ और मरीजों के लिए भी भावनात्मक था।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
इंदौर. भारत के डॉक्टरों की क्षमता दुनिया के डॉक्टरों से कम नहीं है, वरन कई मामलों में दो कदम आगे ही हैं। इसका प्रमाण इंदौर के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जर्री कर के दिया। उज्बेकिस्तान की एक 70 वर्षीय महिला डेढ़ साल से सांस लेने की तकलीफ से गुजर रही थी। उनके फेफडे में ट्यूमर था। स्थिति काफी नाजुक थी। डॉक्टरों के अनुसार महिला के बाएं फेफड़े में तेजी से बढ़ने वाला बड़ा ट्यूमर था, जिसने सांस की नली को लगभग बंद कर दिया था। यह स्थिति जानलेवा हो सकती थी। उज्बेकिस्तान में एडवांस सर्जरी की व्यवस्था नहीं होने के चलते उन्हें इंदौर भेजा गया। यहां के डॉक्टरों ने उनकी सर्जरी की, जो काफी जटिल थी और 5 घंटे चली। डॉक्टरों ने ट्यूमर को फेफड़े सहित पहले बाहर निकाला, फिर उसमें से ट्यूमर के साथ फेफड़े का 40% खराब हिस्सा अलग कर 60% स्वस्थ फेफड़ा फिर से सांस की नली से जोड़ दिया। सर्जरी के बाद तेजी से रिकवरी होने लगी। छह दिन बाद बुजुर्ग विदेशी महिला को डिस्चार्ज किया गया तो वह हॉस्पिटल से नाचते-गाते अपने देश रवाना हुई। डिस्चार्ज के समय महिला भावुक हो गई और भारतीय डॉक्टरों का आभार जताते हुए खुशी से नाचती नजर आईं। यह दृश्य अस्पताल स्टाफ और मरीजों के लिए भी भावनात्मक था।

अल्ला सिमरोनोवा को उज्बेकिस्तान के टिब्ब हेल्थ केयर एंड नेफ्रो मेडिकेयर के डायरेक्टर डॉ. फरीद खान (नेफ्रोलॉजिस्ट) ने इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में रेफर किया था। इसके लिए वहां के लोकल को-ऑर्डिनेटर परवेज खान ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मेडिकल वीजा सहित अन्य दस्तावेजी प्रक्रिया कराई और उन्हें लेकर इंदौर आ गए। इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि इस तरह के ट्यूमर में फेफड़े का खराब हिस्सा पूरी तरह निकालना जरूरी होता है। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पहले फेफड़े और ट्यूमर को सावधानी से बाहर निकाला। इसके बाद ट्यूमर और फेफड़े के 40 प्रतिशत क्षतिग्रस्त हिस्से को अलग कर दिया गया। शेष बचे स्वस्थ फेफड़े को फिर से सांस नली से जोड़ा गया। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज की जान को हर पल खतरा था, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने अनुभव से ऑपरेशन को सफल बनाया।
Published at : 28 Dec 2025, 04:14 pm (IST)
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