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होम / साहित्य / ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन
1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे

उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्मकार मणिकौल ने इसी नाम से फिल्म बनाई थी। उनके उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस किताब के लिए प्रकाशक ने उन्हें 6 महीने में 30 लाख रुपये की रॉयल्टी मिली। इससे साहित्य जगत हैरान रह गया कि हिंदी की किसी गंभीर साहित्यिक कृति को इतनी रॉयल्टी कैसे मिल सकती है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानितकवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)

Source : rashtriya samachar

रायपुर. मशहूर कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का 89 वर्ष की आयु में रायपुर के एम्स में निधन हो गया है. उन्हें सांस लेने में तकलीफ के बाद 2 दिसंबर को भर्ती कराया गया था, और 23 दिसंबर 2025 की शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली. वह ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित थे और अपनी सरल, गहरी और मौलिक लेखन शैली के लिए जाने जाते थे, जिसमें 'नौकर की कमीज़' और 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' जैसे प्रसिद्ध उपन्यास शामिल हैं।
1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्लजी ने शिक्षा को अपना पेशा बनाया, लेकिन मन हमेशा साहित्य सृजन में ही रमा रहा! उन्हें साल 2024 में 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। वे यह सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान पाने वाले छत्तीसगढ़ के पहले और हिंदी के 12वें लेखक थे।
1979 में आए उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्मकार मणिकौल ने इसी नाम से फिल्म बनाई थी। उनकेउपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस किताब के लिए प्रकाशक ने उन्हें 6 महीने में 30 लाख रुपये की रॉयल्टी मिली। इससे साहित्य जगत हैरान रह गया कि हिंदी की किसी गंभीर साहित्यिक कृति को इतनी रॉयल्टी कैसे मिल सकती है।