चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए लिखा – “जहां धर्म है, वहां जीत है।”आने वाले दिनों में इन पांचों राज्यों में चुनावी रैलियां, प्रचार और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : rashtriya samachar
नई दिल्ली. भारत के चुनावी माहौल में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी राज्यों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।
चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही संबंधित राज्यों की सरकारों पर कई प्रकार की प्रशासनिक और राजनीतिक पाबंदियां लागू हो जाती हैं। आचार संहिता का उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना होता है, ताकि कोई भी सरकार या राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।

कब और कहां होंगे चुनाव?
चुनाव आयोग के अनुसार इन राज्यों में मतदान अलग-अलग तारीखों पर कराया जाएगा।
• असम, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा।
• तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग होगी।
• पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे – पहला चरण 23 अप्रैल दूसरा चरण 29 अप्रैल।
इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को एक साथ घोषित किए जाएंगे। उपचुनाव की भी घोषणा इन विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कई राज्यों की कुछ सीटों पर उपचुनाव भी होंगे। • गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को मतदान होगा। • महाराष्ट्र और गुजरात की कुछ सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव होगा, जहां से पहले अजित पवार विधायक थे।
आचार संहिता के बाद सरकार क्या कर सकती है?
आचार संहिता लागू होने के बाद भी सरकार पूरी तरह काम बंद नहीं करती। वह कुछ सीमित प्रशासनिक कार्य जारी रख सकती है। • नियमित और जरूरी प्रशासनिक कार्य जारी रख सकती है। • कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। • प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति में राहत कार्य कर सकती है। • जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी होती है। सरकार क्या नहीं कर सकती? आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार के कई अधिकार सीमित हो जाते हैं। • नई योजनाओं या आर्थिक लाभ की घोषणा नहीं कर सकती। • किसी परियोजना का उद्घाटन या शिलान्यास नहीं किया जा सकता। • अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर रोक लग जाती है। • सरकारी खर्च पर विज्ञापन या प्रचार नहीं किया जा सकता। • चुनाव प्रचार के लिए सरकारी गाड़ी, विमान या संसाधनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस दौरान राज्य के प्रशासनिक अधिकारी सीधे चुनाव आयोग के नियंत्रण में काम करते हैं। चुनावी माहौल हुआ गर्म चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए लिखा – “जहां धर्म है, वहां जीत है।” आने वाले दिनों में इन पांचों राज्यों में चुनावी रैलियां, प्रचार और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
Published at : 15 Mar 2026, 01:05 pm (IST)
Tags : Breaking News / Trending / NEWS UPDATE / Population / VIRAL / #india news / #nationalnews / #news today / #eci #politicalparty #political #electioncommision #electoral