गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेडियापाडा से विधायक चैतर वसावा को वन विभाग के अधिकारियों पर हमला, धमकी और जबरन वसूली के मामले में कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई है। दो साल से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी संकट गहरा गया है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:31 pm (IST)
Source : RASHTRIYA SAMACHAR
गुजरात की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख आदिवासी नेता और डेडियापाडा विधानसभा सीट से विधायक चैतर वसावा को नर्मदा जिले की राजपीपला सेशंस कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई है। यह फैसला वर्ष 2023 में वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मारपीट, धमकी और जबरन वसूली से जुड़े मामले में आया है।
अदालत ने चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा समेत कुल 9 आरोपियों को दोषी करार दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.वी. हिरपारा ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए आरोपियों को सात वर्ष के कारावास की सजा दी।
यह मामला अक्टूबर 2023 का है, जब वन विभाग ने नर्मदा जिले में सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई फसलों को हटाने की कार्रवाई की थी। इसके बाद प्रभावित किसानों के मुआवजे और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए कुछ वनकर्मियों को चैतर वसावा के आवास पर बुलाया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बैठक के दौरान विवाद बढ़ गया और वन अधिकारियों के साथ कथित रूप से गाली-गलौज, मारपीट और धमकी दी गई। आरोप यह भी है कि भय का माहौल बनाने के लिए चैतर वसावा ने अपने हथियार से हवाई फायरिंग की थी। इसके अलावा वन अधिकारियों से कथित रूप से 60 हजार रुपये की जबरन वसूली करने का आरोप भी लगाया गया।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। शुरुआती कार्रवाई में वसावा की पत्नी और उनके निजी सहायक को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि चैतर वसावा कुछ समय तक फरार रहे। गुजरात हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने दिसंबर 2023 में आत्मसमर्पण किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
मामले में 2 नवंबर 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी और जनवरी 2024 में चार्जशीट दाखिल की गई। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी माना।
इस फैसले का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। भारतीय कानून के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी विधानसभा या संसद सदस्यता पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में चैतर वसावा की विधायकी पर भी खतरा मंडरा रहा है।
हालांकि, चैतर वसावा के पास अब भी ऊपरी अदालत में फैसले को चुनौती देने का कानूनी विकल्प मौजूद है। वहीं आम आदमी पार्टी शुरुआत से ही इस मामले को राजनीतिक साजिश करार देती रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वसावा आगे कानूनी लड़ाई कैसे लड़ते हैं और उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर क्या फैसला होता है।
Published at : 23 Jun 2026, 11:51 am (IST)