AI को अपनाकर लागत कम करने की उम्मीद कर रहीं कंपनियां अब उसके बढ़ते खर्च से परेशान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक कंपनी का AI बिल एक महीने में 4200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिससे टेक इंडस्ट्री में नई बहस शुरू हो गई है।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:30 pm (IST)
Source : Rashtriya samachar
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की दौड़ में शामिल कंपनियां अब बढ़ते खर्च से परेशान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक कंपनी ने सिर्फ एक महीने में AI पर करीब 4200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, जिसके बाद इंडस्ट्री में लागत को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
AI को लेकर दुनिया भर की टेक कंपनियां बड़े-बड़े दावे कर रही हैं। कई कंपनियां कर्मचारियों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं और इसे भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बता रही हैं। लेकिन अब AI का एक ऐसा पहलू सामने आ रहा है, जिसने कई बड़ी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ कंपनियों का AI पर होने वाला खर्च उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक कंपनी ने केवल एक महीने में AI सेवाओं पर करीब 500 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इतना बड़ा बिल सामने आने के बाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया।
दरअसल, कंपनियों को शुरुआत में लगा था कि AI की मदद से काम तेजी से होगा, कर्मचारियों पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी कमी आएगी। लेकिन बड़े पैमाने पर AI मॉडल्स का इस्तेमाल करने पर तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। अत्याधुनिक AI सिस्टम को चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार प्रोसेसिंग की जरूरत पड़ती है, जिसका सीधा असर खर्च पर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई कंपनियों ने कर्मचारियों को AI टूल्स इस्तेमाल करने की खुली छूट दे रखी थी। शुरुआत में इससे उत्पादकता बढ़ी, लेकिन उपयोग की कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि कर्मचारी बड़ी संख्या में AI टूल्स का इस्तेमाल करने लगे और कंपनी का खर्च तेजी से बढ़ गया।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Uber और Microsoft जैसी कंपनियां अब AI पर होने वाले खर्च की समीक्षा कर रही हैं। कुछ संगठनों ने AI उपयोग के लिए बजट तय करना और उपयोग की सीमा निर्धारित करना शुरू कर दिया है ताकि लागत को नियंत्रित किया जा सके।
AI सेवाएं आमतौर पर टोकन या उपयोग आधारित मॉडल पर काम करती हैं। हर सवाल, हर विश्लेषण और हर जेनरेट किए गए जवाब के पीछे सर्वर, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग संसाधनों का इस्तेमाल होता है। उपयोग जितना बढ़ता है, लागत भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI और अधिक शक्तिशाली बनेगा, लेकिन इसके साथ इसकी लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे में कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे AI से मिलने वाले फायदे और उस पर होने वाले खर्च के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें। फिलहाल इतना साफ है कि AI सिर्फ अवसर नहीं, बल्कि एक महंगी तकनीकी जिम्मेदारी भी बनता जा रहा है।
Published at : 01 Jun 2026, 10:24 am (IST)
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