पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। ग्लासगो में झंडू कुमार ने पहली सफल लिफ्ट 181 किलोग्राम की लगाई। इसके बाद 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पक्का कर लिया। उन्होंने 196 किलोग्राम उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाने की कोशिश भी की। हालांकि वह प्रयास सफल नहीं रहा, लेकिन उनके चेहरे पर कोई निराशा नहीं थी, क्योंकि उनका सबसे बड़ा सपना पूरा हो चुका था।
By : Admin User | Updated at : 25 Jul 2026, 12:18 pm (IST)
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला पदक दिलाने वाले झंडू कुमार की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले 28 वर्षीय झंडू कुमार ने गरीबी, पोलियो और आर्थिक तंगी जैसी मुश्किलों को हराकर पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
महज पांच साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार का गुजारा सब्जी बेचकर चलता था और कोविड-19 के दौरान दुकान बंद होने के बाद उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर घर की जिम्मेदारी संभाली। दिनभर मेहनत करने के बावजूद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग कभी नहीं छोड़ी।
साल 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। वहीं उनकी मेहनत पर राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर पड़ी, जिन्होंने उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का मौका दिलाया। इसके बाद झंडू ने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में रजत और एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के लिए पहला कांस्य पदक जीता। झंडू कुमार की यह उपलब्धि सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के सामने गरीबी और कठिन परिस्थितियां भी हार मान जाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर झंडू कुमार को बधाई दी। पीएम ने कहा कि उनकी कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और शानदार प्रदर्शन ने भारत का गौरव बढ़ाया है तथा लाखों देशवासियों को प्रेरित किया है।
Published at : 25 Jul 2026, 12:18 pm (IST)