रामायण कालीन परंपरा का वैदिक ध्वजारोहण, राष्ट्र बना साक्षी, अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण, वैदिक मंत्रों से गूंजी अयोध्या, सनातन प्रतीक सूर्य, ॐ और कोविदार वृक्ष धर्म ध्वजा पर अंकित
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
Source : rashtriya samachar
अयोध्या , 25 नवंबर। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मंगलवार का दिन इतिहास में दर्ज होने वाला क्षण बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ध्वजारोहण अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के मुख्य शिखर पर 161 फीट की ऊंचाई पर भव्य धर्म ध्वजा फहराकर रामायण कालीन आध्यात्मिक परंपरा को सजीव कर दिया। ध्वजारोहण प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अभिजीत मुहूर्त में पूरे परिसर में शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि गूंज उठी। आधुनिक तकनीक के प्रयोग के साथ यह ध्वजारोहण परंपरा और नवाचार के उत्कृष्ट संगम का प्रतीक दिखाई दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने बटन दबाया धर्म ध्वज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी। मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने ध्वजारोहण समारोह में अपनी बातों का आगाज सियावर रामचंद्र भगवान, माता जानकी, सरयू मैया की जय, भारत माता की जय और हर हर महादेव के उद्घोष के साथ किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही समूचा मंदिर परिसर जय-जयकार से गूंज उठा।
मन में बसे राम को प्रतिष्ठित कर भारत को विकसित करने का संकल्प लेंः प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (25 नवम्बर, 2025) को अयोध्या धाम में नवनिर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने के बाद संबोधित करते हुए कहा- ‘ये धर्म ध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ओम् शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। ये ध्वज संकल्प है, ये ध्वज सफलता है। ये ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है, ये ध्वज सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। ये ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। आने वाली सदियों और सहस्र-शताब्दियों तक, ये धर्मध्वज प्रभु राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा। ‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर हमें याद रखना है, जो सिर्फ वर्तमान का सोचते हैं, वो आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में भी सोचना है। क्योंकि, हम जब नहीं थे, ये देश तब भी था, जब हम नहीं रहेंगे, ये देश तब भी रहेगा। हम एक जीवंत समाज हैं, हमें दूरदृष्टि के साथ ही काम करना होगा। हमें आने वाले दशकों, आने वाली सदियों को ध्यान में रखना ही होगा।’‘ये गुलामी की मानसिकता ही है, जिसने इतने वर्षों तक रामत्व को नकारा है। भगवान राम, अपने आप में एक वैल्यू सिस्टम हैं। आने वाले एक हज़ार वर्ष के लिए भारत की नींव तभी सशक्त होगी, जब मैकाले की गुलामी के प्रोजेक्ट को हम अगले 10 साल में पूरी तरह ध्वस्त करके दिखा देंगे।’
सदियों का संकल्प सिद्धि को प्राप्त हुआः भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए न जाने कितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, आज उन सबकी आत्मा तृप्त हुई होगी। अशोक सिंहलजी को वहां पर शांति मिली होगी और आज मंदिर का ध्वजारोहण हो गया। डॉ. भागवत ने कहा कि यह उसी रामराज्य का ध्वज है जो कभी अयोध्या में और पूरे विश्व में फहराता था, आज मंदिर पर फहराया है। इस भगवा ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है। यह वही वृक्ष है जिसके लिए कहा जाता है कि वृक्ष सबके लिए छाया देते हैं, लेकिन स्वंय धूप में खड़े रहते हैं। फल भी दूसरों के लिए देते हैं। रामराज्य का ध्वज यही संदेश देता है कि स्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों लेकिन उसे अपने धैर्य के साथ अनुकूलता में बदलना है और आज हिंदू समाज ने राम मंदिर के लिए 500 साल तक संघर्ष करके दिखा दिया है। इसी सत्य पर आधारित धर्म दुनिया को देने वाला भारत आज खड़ा हो गया है। आज अयोध्या पूरी दुनिया का सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बन रही है और पूरी दुनिया राममय है। यह धर्मध्वज ही नहीं अपितु भारत के पु्नर्जागरण का प्रतीक भी है और इसका भगवा रंग सदियाें के संकल्प का प्रतीक है। डॉ. भागवत ने श्रीराम मंदिर आंदाेलन का जिक्र करते हुए कहा कि आज सदियों के घाव भर गए हैं और सदियों का संकल्प सिद्धि को प्राप्त हो गया है और 500 से चल रहे यज्ञ की पूर्णाहुति हो गई है। यह धर्मध्वज सहस्र शताब्दियों तक उद्घोष करेगा। सूर्य भगवान उस संकल्प का प्रतीक हैं। जैसे सपना उन लोगों ने देखा था, बिल्कुल वैसा ही या यूं कहें कि उससे भी भव्य मंदिर बन गया है। उन्हाेंने रथ के सारथी और सात घाेड़ाें काे अलग-अलग निरुपित करते हुए कहा कि भारत दया, विनम्रता, करुणा का संदेश दुनिया काे दे रहा है। ध्वज में कोविदार वृक्ष की छवि के साथ 'ओम' अंकितराम मंदिर के शिखर पर फहराया गया ध्वज 10 फुट ऊंचा और 20 फुट लंबा, समकोण त्रिभुजाकार है। ध्वज पर एक उज्ज्वल सूर्य की छवि है, जो भगवान राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, साथ ही कोविदार वृक्ष की छवि के साथ ध्वज पर 'ओम' अंकित है। इस ध्वज पर कोविदार वृक्ष का चिह्न अंकित है। इसके साथ सूर्य और ऊं के चिह्न को भी ध्वज में स्थान मिला है। कोविदार वृक्ष अयोध्या के रघुकुल वंश का प्रतीक चिह्न है। सूर्यवंशी होने के नाते ध्वज में सूर्य के चिह्न को स्थान दिया गया है। कोविदार वृक्ष श्रीराम के रघुवंश का प्रतीक चिह्न है। इसे उनके वंश के तप और त्याग के प्रतीक के रूप में राम मंदिर के शिखर पर स्थान दिया गया है।
000 -सामाजिक समरसता का संदेश
समारोह में विशिष्ट अतिथि, संत-महंत और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में अनुसूचित जाति, जनजाति के संत, महंत, पुजारी, कथावाचकों व जाति बिरादरी के मुखिया, चौधरी, वनवासी संतों को बुलाकर सामाजिक समरसता का संदेश देने का काम भी किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बाकायदा सामाजिक समरसता गतिविधि के सहयोग से ऐसे लोगों की सूची मंगवाकर उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया, अपितु उनको अयोध्या लाने और यहां ठहराने की व्यवस्था की।
Published at : 25 Nov 2025, 07:47 pm (IST)
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