सरकारी नियमों के अनुसार, जूनियर लिपिक की नियुक्ति के बाद एक साल के अंदर टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। परीक्षा में न्यूनतम गति एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने की तय की गई है। इन तीनों कर्मचारियों ने इस मानक को पूरा नहीं किया
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
Source : Rashtriya Samachar
कानपुर . उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का एक मामला ऐसा सामने आया है, जो देशभर के ऐसे कर्मचारियों के लिए सबक साबित हो सकता है, जिन्होंने जुगाड़ से नौकरी हासिल की है या उस पद के लिए अपात्र हैं। दरअसल सरकारी दफ़तर में काम करने वाले तीन बाबू एक मिनट में 25 शब्द भी टाइप नहीं कर सके और लगातार दो बार टाइपिंग परीक्षा में असफल रहे। उन्होंने नौकरी के दौरान सीखने की कोशिश भी नहीं की। इसके देखते हुए जिलाधिकारी ने सख्त कदम उठाया और उन्हे उनके पद से घटाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया। यह कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है ।
तीनों जूनियर लिपिकों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी,इनमें एक महिला भी थीं। सरकारी नियमों के अनुसार, जूनियर लिपिक की नियुक्ति के बाद एक साल के अंदर टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। परीक्षा में न्यूनतम गति एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने की तय की गई है। इन तीनों कर्मचारियों ने इस मानक को पूरा नहीं किया था। इससे पहले साल 2024 में जब टाइपिंग परीक्षा में भी तीनों असफल रहे। नियम के मुताबिक,पहली बार असफलता पर उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि (इनक्रिमेंट) रोक दी गई । प्रशासन ने सुधार का मौका देते हुए 2025 में दूसरी बार परीक्षा का अवसर दिया, लेकिन इस बार भी प्रेमनाथ निर्धारित गति हासिल नहीं कर पाए।
लगातार दो असफलताओं के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त निर्णय लिया और डिमोशन कर चपरासी बना दिया। अब ये तीनों कर्मचारी चपरासी के रूप में ड्यूटी करेंगे। यह कार्रवाई प्रशासनिक योग्यता बनाए रखने के लिए की गई।
नियुक्तियों पर उठ रहे सवाल-
कानपुर शहर में लोग इसे प्रशासन की सख्ती का उदाहरण मान रहे हैं, तो कुछ इसे मृतक आश्रित कोटे से आई नियुक्तियों की योग्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। लिपिकों को दैनिक कार्यों में दस्तावेज तैयार करना, पत्र लिखना और डेटा एंट्री करना होता है। ऐसे में यदि बेसिक योग्यता नहीं होगी तो कामकाज प्रभावित होता है।
अन्य कर्मचारी स्किल्स सुधार रहे-
सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के फैसले ने अन्य कर्मचारियों में भी सतर्कता पैदा कर दी है। कई कर्मचारी अब अपनी स्किल्स सुधारने में लग गए हैं।
Published at : 08 Apr 2026, 02:55 pm (IST)
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