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होम / राष्ट्रीय / अहमदाबाद में बनी ध्वजा का राममंदिर में हुआ आरोहण, तीन-परत वाली विशेष मटेरियल से बनी है, 10 कारीगरों ने 25 दिनों में तैयार किया
अहमदाबाद में बनी ध्वजा का राममंदिर में हुआ आरोहण, तीन-परत वाली विशेष मटेरियल से बनी है, 10 कारीगरों ने 25 दिनों में तैयार किया
5100 किलो का ध्वज-दंड भी अहमदाबाद में बना

यह विशेष ध्वजा गुजरात के अहमदाबाद में तैयार की गई है। यह ध्वजा 10 फ़ुट ऊंची और 20 फ़ुट लंबी है, राम मंदिर ट्रस्ट ने पहले से ही इस ध्वजा का डिज़ाइन दिया था

अहमदाबाद में बनी ध्वजा का राममंदिर में हुआ आरोहण, तीन-परत वाली विशेष मटेरियल से बनी है, 10 कारीगरों ने 25 दिनों में तैयार किया

Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)

अहमदाबाद, 25 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 191 फ़ुट ऊँचे मुख्य शिखर पर आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों ध्वजारोहण किया गया। यह विशेष ध्वजा गुजरात के अहमदाबाद में तैयार की गई है। यह ध्वजा 10 फ़ुट ऊंची और 20 फ़ुट लंबी है, जिसका निर्माण श्री अंबिका इंजीनियरिंग वर्क्स ने किया है। राम मंदिर ट्रस्ट ने पहले से ही अंबिका इंजीनियरिंग वर्क्स को इस ध्वजा का डिज़ाइन दिया था, जिसके आधार पर 10 कारीगरों ने लगातार 25 दिनों तक काम करके इसे तैयार किया। आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।(राम मंदिर ध्वजा में तीन-लेयर मटेरियल का उपयोग किया गया है। इसके दोनों तरफ भगवान राम से जुड़े पवित्र प्रतीक कल्पवृक्ष, सूर्यनारायण और ॐ उकेरे गए हैं। ये सभी डिज़ाइन राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दिए गए पैटर्न के अनुसार बनाए गए हैं। गौरव की बात यह है कि इस ध्वजा को बनाने वाले परिवार को भी राम मंदिर में यजमान के रूप में प्रतिष्ठा दी गई और हवन में विशेष स्थान दिया गया।

श्री अंबिका इंजीनियरिंग को सिर्फ ध्वजा ही नहीं, बल्कि मंदिर के कई अन्य निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी भी मिली थी। इनके द्वारा तैयार किया गया विशाल ध्वज-दंड 42 फ़ुट लंबा और 5100 किलो वज़नी है। इसे भी अहमदाबाद से अयोध्या भेजा गया। साथ ही मंदिर के लिए दानपेटी, हंडी भंडार, आभूषण रखने के लिए पीतल के संदूक (बाक्स) दरवाज़ों के सामान, मंदिर के कड़े आदि भी इसी संस्थान ने बनाए हैं।

80 वर्षों से मंदिरों के लिए ध्वजा बनाते आ रहे हैं : कश्यप मेवाडा

श्री अंबिका इंजीनियरिंग संस्थान के मालिक कश्यप मेवाडा ने बताया कि ध्वजा में रेशमी साटन का उपयोग किया गया है और दोनों ओर पवित्र प्रतीक बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 810 कारीगरों ने 25 दिनों तक लगातार काम करके अयोध्या में राम मंदिर के लिए यह ध्वजा तैयार की है।हम पिछले डेढ़दो साल से राम मंदिर के विभिन्न ऑर्डर्स पर काम कर रहे हैं। हमारा परिवार पिछले 80 वर्षों से बड़े मंदिरों के लिए ध्वज निर्माण करता आया है। सबसे बड़ा गर्व यह है कि इस ध्वजा को प्रधानमंत्री मोदी के हाथों चढ़ाया गया और मेरे माता-पिता को यजमान के रूप में बैठने का सम्मान मिला।” अहमदाबाद में बनी यह ध्वजा आज राम मंदिर के मुख्य शिखर पर लहराने लगी, जो पूरे देश के लिए गर्व का क्षण होने के साथ ऐतिहासिक भी है।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अनुसार दाएं कोण वाले तिकोने झंडे की ऊंचाई 10 फुट और लंबाई 20 फुट है। इस पर चमकते सूरज की तस्वीर है, जो भगवान श्री राम की चमक और वीरता का प्रतीक है। इस पर 'ॐ' लिखा है और साथ ही कोविदारा पेड़ की तस्वीर भी है। पवित्र भगवा ध्वज राम राज्य के आदर्शों को दिखाते हुए, गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देगा।

ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर वास्तुकला शैली में निर्मित शिखर के ऊपर फहराया जाएगा, जबकि आसपास का 800 मीटर का परकोटा, मंदिर के चारों ओर बना एक परिक्रमा घेरा, जिसे दक्षिण भारतीय वास्तुकला परंपरा में डिजाइन किया गया है, मंदिर की वास्तुकला विविधता को प्रदर्शित करता है।