Starship की यह उड़ान भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। SpaceX इस रॉकेट को पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने योग्य बनाना चाहता है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम की जा सके। NASA के Artemis कार्यक्रम में भी चांद पर इंसानों को दोबारा भेजने के लिए Starship के एक विशेष मॉडल का इस्तेमाल किया जाना है।
By : Admin User | Updated at : 25 Jul 2026, 05:12 pm (IST)
SpaceX ने शनिवार, 25 जुलाई को दुनिया के सबसे बड़े और ताकतवर रॉकेट Starship की 13वीं टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक लॉन्च की। भारतीय समय के मुताबिक सुबह 4:21 बजे टेक्सास के Starbase से उड़ान भरने वाले इस मिशन का उद्देश्य नई तकनीकों का परीक्षण, Starlink V3 सैटेलाइट की तैनाती और भविष्य के चांद-मंगल मिशनों की तैयारी करना था।
उड़ान के करीब ढाई मिनट बाद Super Heavy बूस्टर और Starship का ऊपरी हिस्सा अलग हो गया। इसके बाद बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में नियंत्रित लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन लैंडिंग के दौरान सभी Raptor इंजन सही तरीके से चालू नहीं हो सके। इसके चलते बूस्टर की सॉफ्ट लैंडिंग सफल नहीं हो पाई। हालांकि, Starship अपने निर्धारित रास्ते पर आगे बढ़ती रही।
अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद Starship ने पहली बार 20 Starlink V3 सैटेलाइट तैनात किए। ये सैटेलाइट पिछली पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा शक्तिशाली हैं और तेज इंटरनेट सेवा देने के साथ लेजर लिंक तकनीक के जरिए एक-दूसरे से सीधे संपर्क करने में सक्षम हैं।
उड़ान के एक घंटे से ज्यादा समय बाद Starship ने पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश किया और तय योजना के मुताबिक हिंद महासागर में स्प्लैशडाउन किया। इस दौरान हीट शील्ड, कंट्रोल सिस्टम और री-एंट्री क्षमता समेत कई अहम तकनीकों का परीक्षण किया गया।
Starship की यह उड़ान भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। SpaceX इस रॉकेट को पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने योग्य बनाना चाहता है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम की जा सके। NASA के Artemis कार्यक्रम में भी चांद पर इंसानों को दोबारा भेजने के लिए Starship के एक विशेष मॉडल का इस्तेमाल किया जाना है। वहीं SpaceX का दीर्घकालिक लक्ष्य इसी तकनीक के जरिए इंसानों और भारी सामान को मंगल तक पहुंचाना है।
Published at : 25 Jul 2026, 05:12 pm (IST)
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