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होम / राष्ट्रीय / सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला निजता का अधिकार अफेयर के सबूत छिपाने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला निजता का अधिकार अफेयर के सबूत छिपाने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता
तलाक मामलों में कॉल डिटेल और होटल रिकॉर्ड जैसे सबूतों को कोर्ट में पेश करने पर रोक नहीं लगाई जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार तलाक मामलों में अफेयर के सबूत छिपाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कॉल रिकॉर्ड और होटल स्टे रिकॉर्ड को न्यायिक प्रक्रिया में स्वीकार्य बताया है।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसलानिजता का अधिकार अफेयर के सबूत छिपाने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता

By : Admin User | Updated at : 04 Jul 2026, 04:11 pm (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार इतना व्यापक नहीं है कि उसका इस्तेमाल वैवाहिक विवादों में सबूतों को छिपाने के लिए किया जाए। अदालत ने कहा कि तलाक के मामलों में यदि किसी पक्ष पर व्यभिचार के आरोप हैं, तो कॉल डिटेल रिकॉर्ड और होटल में ठहरने जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को केवल निजता के आधार पर अदालत में पेश करने से नहीं रोका जा सकता।

यह फैसला जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के पहले के निर्णय को बरकरार रखा गया। हाई कोर्ट ने भी कहा था कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए उस पर उचित सीमाएं लगाई जा सकती हैं।

मामला एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसके पति का शादी के बाद भी किसी अन्य महिला के साथ संबंध था और वह उसके साथ जयपुर के एक होटल में ठहरा था। इसके बाद पत्नी ने तलाक की याचिका दायर करते हुए होटल बुकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड अदालत से मंगाने की मांग की थी।

परिवार न्यायालय ने यह मांग स्वीकार की थी, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सच्चाई सामने लाने के लिए जरूरी दस्तावेजों को रोका नहीं जा सकता।