दिल्ली की सियासत में सबसे बड़ा उलटफेर! राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल समेत 7 सांसदों ने AAP छोड़कर BJP जॉइन कर ली है। जानें इस बड़ी फूट की वजह और राज्यसभा में क्या होगा असर।
Updated at : 02 Jul 2026, 05:29 pm (IST)
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर शुक्रवार को वह बगावत देखने को मिली, जिसकी कल्पना शायद अरविंद केजरीवाल ने भी नहीं की होगी। पार्टी की स्थापना के 14 साल के भीतर यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के नेतृत्व में कुल 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
संविधान के तहत BJP में 'विलय' की तैयारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने साफ किया कि यह केवल इस्तीफा नहीं बल्कि एक रणनीतिक विलय है। उन्होंने कहा, "राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 में से दो-तिहाई से ज्यादा (7 सांसद) सदस्य हमारे साथ हैं। हमने संविधान के प्रावधानों के तहत BJP में विलय का फैसला किया है और इसके दस्तावेज राज्यसभा चेयरमैन को सौंप दिए गए हैं।"
ये बड़े नाम हुए BJP में शामिल
AAP छोड़कर BJP का दामन थामने वाले 7 सांसदों की सूची इस प्रकार है:
1. राघव चड्ढा (पार्टी के फाउंडिंग मेंबर)
2. संदीप पाठक (पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री)
3. अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक)
4. हरभजन सिंह (पूर्व दिग्गज क्रिकेटर)
5. स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW अध्यक्ष)
6. राजेंद्र गुप्ता
7. विक्रमजीत सिंह साहनी
'सही आदमी, गलत पार्टी' – राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा, "जिस पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब सिद्धांतों से भटक चुकी है। मैं पिछले 1 साल से पार्टी की गतिविधियों से दूर था क्योंकि मैं उनके गलत कामों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था। आज मुझे गर्व है कि मैं राष्ट्र सेवा के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काम करूँगा।"
संदीप पाठक का छलका दर्द
AAP के रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा केजरीवाल को सर्वोपरि रखा, लेकिन पार्टी अब देश सेवा के बजाय निजी फायदों के लिए काम कर रही है।
AAP के लिए राजनीतिक अस्तित्व का संकट?
इन 7 दिग्गजों के जाने के बाद राज्यसभा में AAP के पास अब केवल संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह ही बचे हैं। संगठन के स्तर पर संदीप पाठक जैसे रणनीतिकार का जाना और युवाओं के बीच लोकप्रिय राघव चड्ढा का साथ छोड़ना, केजरीवाल के लिए आगामी चुनावों में बड़ी चुनौती साबित होगा।
Published at : 24 Apr 2026, 10:34 am (IST)
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