सिब्बल ने कहा।- "मुझे लगता है कि हमारी संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है। अब बैठकें कम होती हैं... यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि असली मुद्दों पर चर्चा नहीं होती है। इसके बजाय, ऐसे विषय उठाए जाते हैं जो आज के समय के लिए अप्रासंगिक हैं... ऐसा लगता है कि सत्ता में बैठे लोगों को संसद की ज़्यादा परवाह नहीं है..."
Updated at : 02 Jul 2026, 05:28 pm (IST)
Source : ANI
नई दिल्ली, 19 दिसंबर . राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि संसद धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खो रही है और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह विकास लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि असली मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है।
राज्यसभा सांसद ने आगे दावा किया कि सत्ता में बैठे लोग संसद की ज़्यादा परवाह नहीं करते हैं, और वंदे मातरम बहस का ज़िक्र करते हुए, सिब्बल ने दावा किया कि सदन में ऐसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं जो आज की चिंताओं से अप्रासंगिक हैं।
"मुझे लगता है कि हमारी संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है। अब बैठकें कम होती हैं... यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि असली मुद्दों पर चर्चा नहीं होती है। इसके बजाय, ऐसे विषय उठाए जाते हैं जो आज के समय के लिए अप्रासंगिक हैं... ऐसा लगता है कि सत्ता में बैठे लोगों को संसद की ज़्यादा परवाह नहीं है..."
सिब्बल ने कहा -"विपक्ष 1 दिसंबर को SIR पर चर्चा चाहता था क्योंकि SIR आज देश का सबसे बड़ा मुद्दा है... लेकिन वे बहाना बना रहे हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि चुनाव आयोग उनके इशारे पर जो कार्रवाई करता है, वह जनता के सामने आए... 'वंदे मातरम' का मुद्दा आज कैसे प्रासंगिक है? क्या RSS 'वंदे मातरम' गाता है?... क्या BJP अपनी बैठकें 'वंदे मातरम' से शुरू करती है... फिर उन्होंने कहा कि वे चुनावी सुधारों पर चर्चा करेंगे... उन्होंने कौन से चुनावी सुधार किए हैं? यह सब हमने किया था, जिसका उन्होंने गलत इस्तेमाल किया..."
Published at : 19 Dec 2025, 12:16 pm (IST)
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